झारखंड कांग्रेस के इन बड़े नेताओं को पार्टी की नहीं, बेटे-बहू की चिंता!

झारखंड कांग्रेस में पुराने और उम्रदराज नेताओं की लंबी फेहरिस्त है. ये सालों से टिकट बंटवारे में अपना दबदबा बनाए हुए हैं. ये वे नेता हैं, जिनका अपना हित पार्टी के हित से ऊपर होता है.

Bhuvan Kishor Jha | News18 Jharkhand
Updated: July 16, 2019, 5:14 PM IST
झारखंड कांग्रेस के इन बड़े नेताओं को पार्टी की नहीं, बेटे-बहू की चिंता!
झारखंड कांग्रेस में पुराने और उम्रदराज नेताओं की लंबी फेहरिस्त है. ये सालों से टिकट बंटवारे में अपना दबदबा बनाए हुए हैं. ये वे नेता हैं, जिनका अपना हित पार्टी के हित से ऊपर होता है.
Bhuvan Kishor Jha | News18 Jharkhand
Updated: July 16, 2019, 5:14 PM IST
अगले कुछ महीने में झारखंड में विधानसभा चुनाव होना है. लेकिन लोकसभा चुनाव की हार की हताशा से प्रदेश कांग्रेस उबर नहीं पाई है. नतीजा यह है कि पार्टी अभी तक विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी भी शुरू नहीं हुई है. लेकिन पार्टी के बड़े नेता अपने परिवारवालों के टिकट के लिए मैदान तैयार करने में जरूर जुट गये हैं.

उम्रदराज नेताओं की लंबी फेहरिस्त
लाख कोशिशों के बावजूद कांग्रेस परिवारवाद की परछाई से बाहर नहीं निकल पा रही. झारखंड की बात करें, तो यहां पुराने और उम्रदराज नेताओं की लंबी फेहरिस्त है. ये सालों से पार्टी के अहम पदों पर कब्जा जमाये हुए हैं. साथ ही टिकट बंटवारे में अपना दबदबा बनाए हुए हैं. ये वे नेता हैं, जिनका अपना हित पार्टी के हित से ऊपर होता है. इससे गठबंधन प्रभावित होता रहा है.

भाई- बेटे के लिए टिकट की होड़ में बड़े नेता

सुबोधकांत सहाय- हटिया से भाई सुनील सहाय को टिकट दिलवाना चाहते हैं. पहले भी किस्मत आजमा चुके हैं सुनील सहाय, मगर कामयाबी नहीं मिली.

प्रदीप कुमार बलमुचू- बेटी सिंड्रेला बलमुचू को घाटशिला से लड़ाना चाहते हैं और बेटी को टिकट नहीं मिलने पर खुद लड़ना चाहते हैं. राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद बेटी सिंड्रेला को लड़ा चुके हैं विस चुनाव

ददई दुबे- विश्रामपुर विधानसभा सीट से बेटे अजय कुमार दुबे को चुनाव लड़वाया, लेकिन जीता नहीं सके. इस बार फिर ददई दुबे और पुत्र अजय दुबे टिकट के दावेदारों में शामिल हैं.
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योगेन्द्र साव- पत्नी निर्मला देवी को बड़कागांव से विधायक बनवाया. बेटी अंबा प्रसाद को भी राजनीति में लाए. लेकिन लोकसभा चुनाव में कामयाबी नहीं मिल पाई. अब विधानसभा चुनाव में बेटी के लिए टिकट की जुगत में हैं.

सुखदेव भगत- विधायक से सांसद नहीं बन पाए. पत्नी अनुपमा भगत को नगर निकाय चुनावों में टिकट दिलाकर अध्यक्ष बनवाया. बेटे को यूथ कांग्रेस का पदाधिकारी बनवाया. अब परिवारवालों को विधायक, सांसद के साथ अहम पदों पर देखना चाहते हैं

गीताश्री उरांव- सिसई से विधायक रही हैं. पति अरूण उरांव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़ना चाहते हैं. दोनों के पूर्वज कांग्रेस से जुड़े रहे हैं. कार्तिक उरांव और बंदी उरांव कांग्रेस के नेता थे.

फुरकान अंसारी- बेटे इरफान अंसारी जामताड़ा से विधायक हैं. इसके अलावा एक अन्य सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं.

धीरज साहू- गोपाल साहू कांग्रेस के सांसद रहे हैं. शिव प्रसाद साहू के भाई धीरज प्रसाद साहू लोक सभा में प्रवेश नहीं कर पाए, तो राज्य सभा पहुंचे गए. अब भाई गोपाल प्रसाद साहू के लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद पार्टी में बने रहने का मोह नहीं छोड़ना चाहते.

राजेंद्र प्रसाद सिंह- बेटे अनूप सिंह और कुमार गौरव को बेरमो और बोकारो से विस चुनाव लड़ना चाहते हैं.

तिलकधारी सिंह- बेटे धनंजय सिंह के लिए कोडरमा सीट मांग रहे हैं.

आलमगीर आलम- बेटे तनवीर आलम और खुद के लिए पाकुड़ से टिकट चाहते हैं.

गीता कोड़ा- कांग्रेस में शामिल होकर गीता कोड़ा सांसद बनीं. अब पारंपरिक सीट जगन्नाथपुर से किसी संबंधी को टिकट दिलाने में जुटे हैं.

अवध बिहारी सिंह- बहू दीपिका पाण्डेय सिंह पारंपरिक महगामा सीट से किस्मत आजमाना चाहती हैं.

निएल तिर्की- बेटे विशाल तिर्की के लिए सिमडेगा सीट से टिकट पाना चाहते हैं.

परिवारवाद की गिरफ्त में झारखंड कांग्रेस


पकड़ के आधार पर मिलना चाहिए टिकट 
इनके अलावा सरफराज अहमद, ओपी लाल, के एन झा, मन्नान मल्लिक जैसे उम्रदराज नेता टिकट के लिए टकटकी लगाये हुए हैं. हालांकि पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने कांग्रेस को परिवारवाद से मुक्ति की वकालत करते हैं. उनका कहना है कि वैसे लोगों को ही चुनाव मैदान में उतारना चाहिए, जिनकी जनता के बीच पकड़ हो. बड़े नेता के पुत्र या संबंधी होने के आधार पर टिकट नहीं मिलना चाहिए.

सबक लेने को तैयार नहीं बड़े नेता
परिवारवाद के कारण लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठानी पड़ी है. इसको लेकर पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ऐतराज भी जता चुके हैं. ऐसे में झारखंड के कांग्रेसियों को भी सबक लेना चाहिए. मगर, जो परिस्थितियां बन रही हैं, उससे साफ है कि झारखंड कांग्रेस में भी बड़े नेता टिकट पाने के लिए अभी से पार्टी के अंदर दबाव बनाने में जुट गये हैं.

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First published: July 16, 2019, 4:40 PM IST
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