Jharkhand : उम्रदराज पुलिसकर्मियों को नियम के विरुद्ध दी गई ट्रेनिंग, CAG रिपोर्ट में हुआ खुलासा

आज जारी सीएजी रिपोर्ट में कई तरह के गैरजरूरी खर्च पर आपत्तियां जताई गई हैं.
आज जारी सीएजी रिपोर्ट में कई तरह के गैरजरूरी खर्च पर आपत्तियां जताई गई हैं.

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद निरोधक और आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण वैसे पुलिसकर्मियों को दिया गया जो निर्धारित आयु सीमा से ज्यादा के थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:26 PM IST
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रांची. झरखंड (Jharkhand) के सरकारी विभागों के कामकाज और विभिन्न योजनाओं पर हुए खर्च का लेखा-जोखा प्रधान महालेखाकार इंदू अग्रवाल (Indu Agarwal) ने आज जारी किया. इससे पहले विधानसभा में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) ने वित्तीय वर्ष 2017-18 का राज्य वित्त, राजस्व प्रक्षेत्र और सामान्य, सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी. इसके अलावे राज्य के 2018-19 की वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट भी जारी की गई. महालेखाकार द्वारा जारी सीएजी (CAG) रिपोर्ट में 2013-18 के दौरान पुलिसबल के आधुनिकीकरण पर किए गए गैरजरूरी खर्च पर आपत्ति जताई है. रिपोर्ट में राज्य पुलिस के पास आधुनिक हथियारों की कमी को दर्शाया गया है. साथ ही पुलिस बल बटालियन में जैकेटों की कमी 43 से 100% के बीच होने की बात कही गई है, जिससे अभियान के दौरान हताहत होने का खतरा बढ़ गया था. सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद निरोधक और आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण वैसे पुलिसकर्मियों को दिया गया जो निर्धारित आयु सीमा से ज्यादा के थे. कारतूस की कमी और फायरिंग रेंज की अनुपलब्धता के कारण पुलिसकर्मियों को पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं मिली. इसके अतिरिक्त विभाग ने 2013-18 के दौरान पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत 52.25 करोड़ का राज्यांस जारी नहीं किया तथा 4.22 करोड़ के केंद्रीय मद के पैसों का उपयोग भी नहीं कर पाई.

धीमी उपयोगिता के कारण 2016-18 के दौरान केंद्रीय मद के 21.31 करोड़ का नुकसान हुआ. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता तथा योजना विभाग में वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए डीजेएसडी की दर से अधिक दर पर डेस्क-बेंचों की खरीदारी की गई, जिसमें 2.28 करोड़ का अधिक व्यय हुआ. इसके अलावा 81.54 मूल्य के 1087 डेस्क बेंच आवश्यकता से अधिक खरीदे गए, जो बेकार पड़े रह गए. पथ निर्माण विभाग में संजय नदी पर पुल का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के बाद पुल 3 साल तक ऐसे ही पड़ा रहा, जिस पर 7.36 करोड़ करोड़ का खर्च यूं ही खर्च हुआ.





पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा 8 वर्षों में डीआई जलापूर्ति में डीआई जलापूर्ति पाइप के उपयोग में विफल रहने के कारण 2.56 करोड़ रुपए यूं ही पड़ा पड़ा रहा. सीएजी ने खेल के मैदान के बिना बनाएं स्टेडियम के निर्माण में 1.28 करोड़ रुपए के खर्च पर भी आपत्ति जताई है. एजी ने 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में राजस्व प्राप्ति पिछले वर्ष से 3,396 करोड़ अधिक बताया है जो बजट अनुमान से कम था. राज्य की राजस्व प्राप्तियां 2017-18 में 52,756 करोड़ थीं, जबकि 2018-19 में 56,152 करोड़ हो गईं. 2018-19 के दौरान राजस्व व्यय 50631 करोड़ था जबकि 2017-18 में राजस्व व्यय 50952 करोड रहा था. इस तरह से राजस्व व्यय 321 करोड़ घटा है.
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