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रांची के इस रेस्टोरेंट में मिलेगा आदिवासी जायका, साल के पत्तों पर परोसा जाएगा भोजन, जमीन पर बैठकर लें खाने का स्वाद

Jharkhandi food: इस रेस्टोरेंट में मिट्टी के चूल्हे हैं, जिनमें लकड़ियां सुलगाई जाती हैं और लकड़ी की आंच पर खाना पकाया ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट : शिखा श्रेया

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा रेस्टोरेंट है, जहां खाना बनाने से लेकर परोसने तक में आदिवासी परंपरा का निर्वहन किया जाता है. यहां मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आंच से खाना पकाया जाता है. यहां आनेवाले ग्राहकों की आवभगत मेहमानों की तरह की जाती है. पारंपरिक तरीके से जमीन पर बैठाकर साल (एक पेड़) के पत्ते पर खाना परोसा जाताहै. रेस्टोरेंट की दीवारों आदिवासी पेंटिंग से सजाई गई हैं. इतना ही नहीं, यहां प्रवेश से पहले चप्पल व जूते बाहर ही उतारने होते हैं.

दरअसल बात हो रही है रांची के कांके रोड स्थित कुजूर क्लीनिक के ठीक पीछे आजम एंबा रेस्टोरेंट की. जिसका संचालन आदिवासी समाज से आनेवाली अरुणा तिर्की कर रही हैं. उन्होंने न्यूज18 लोकल को बताया कि आदिवासी खानपान और इसे बनाने का तौर तरीका हमारी सेहत को ठीक रखता है और स्वास्थ्यवर्धक भी होता है. इस रेस्टोरेंट में इसका ख्याल रखा जाता है, जिससे लोग भी आकर्षित हो रहे हैं.

…ताकि आदिवासी कल्चर को मिले बढ़ावा

अरुणा ने 1998 में एक्सआईएसएस रांची से रूलर डेवलपमेंट की पढ़ाई पूरी की. शुरू से आदिवासी कल्चर को बढ़ावा देने की इच्छा थी. इसलिए नौकरी के बजाय इस क्षेत्र में आ गईं. रेस्टोरेंट में खाना बनाने से परोसने तक के काम के लिए आदिवासी समाज की लड़कियां नियुक्त की गईं. ये सारी लड़कियां आदिवासी वेशभूषा तो होती ही हैं, आदिवासी तरीकों से खाना बनाती हैं और परोसने का काम भी पारंपरिक तरीके से ही करती हैं.

मिट्टी का चूल्हा और लकड़ी की आंच

इस रेस्टोरेंट में मिट्टी के चूल्हे हैं, जिनमें लकड़ियां सुलगाई जाती हैं और लकड़ी की आंच पर खाना पकाया जाता है. खाना पकाने के लिए भी मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है. यहां आपको लाल चावल, देसी दाल, सीजनल सब्जी व साग, मौसमी चीजों की चटनी, चावल व मड़ूआ का छिलका, राइस टी, धुस्का, घुघनी, हांडी मटन, देसी चिकन सहित अन्य डिश जाएंगे. सभी आइटम 60 रुपये से लेकर 450 रुपये तक में उपलब्ध हैं.

नई पीढ़ी सीख रही पारंपरिक तौर तरीके

यहां परिवार के साथ खाने पहुंचे दीपक ने बताया कि गांव में अभी भी जमीन पर बैठकर खाना खाने का चलन है. हां, शहर में जरूर यह खत्म होता जा रहा है. ऐसे में इस रेस्टोरेंट की यह अच्छी पहल है. इससे नई पीढ़ी खानपान के पारंपरिक तौर तरीकों से अवगत होंगे. उन्होंने कहा कि यहां खाने का स्वाद बिल्कुल घर के खाने के जैसा है.

Tags: Healthy food, Jharkhand news, Ranchi news

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