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आदिवासी संगठनों ने नौकरियों के लिए नई नीति लाने का बढ़ाया दबाव, हेमंत सोरेन सरकार को 15 नवंबर तक का अल्‍टीमेटम

Ranchi News: आदिवासी संगठनों ने स्‍थानीय नियोजन नीति को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. (न्‍यूज 18)

Ranchi News: आदिवासी संगठनों ने स्‍थानीय नियोजन नीति को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. (न्‍यूज 18)

Jharkhamd News: आदिवासी-मूलवासी से जुड़े तकरीबन 35 संगठनों ने स्‍थानीय नियोजन नीति लाने को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है. इन संगठनों ने प्रदेश सरकार को इस बाबत 15 नवंबर तक का अल्‍टीमेटम दिया है.

  • News18Hindi
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    अविनाश कुमार

    रांची. झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सरकार द्वारा स्‍थानीयता को बढ़ावा देने वाले बयान के बाद अब आदिवासी-मूलवासी संगठनों ने प्रदेश सरकार पर स्‍थानीय नियोजन नीति लाने का दबाव बढ़ा दिया है. झारखंड के करीब 35 छोटे-बड़े संगठनों ने इसको लेकर हेमंत सरकार को 15 नवंबर तक का अल्‍टीमेटम दिया है. इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस तिथि तक मौजूदा सरकार ने कोई घोषणा नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा. बता दें कि 15 नवंबर को झारखंड का स्‍थापना दिवस भी है.

    झारखंड में स्थानीय और नियोजन नीति का मुद्दा राजनीतिक गलियारों से निकलते हुए अब सामाजिक गोलबंदी की ओर तेजी से बढ़ने लगा है . राज्य के करीब 35 आदिवासी-मूलवासी संगठनों ने प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ सीधी लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है. झारखंड की स्थानीय नीति और नियोजन नीति की घोषणा के लिए राज्य सरकार को 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया है. इन संगठनों का कहना है कि इस अवधि तक राज्य सरकार द्वारा स्थिति स्पष्ट न होने पर बड़े आंदोलन का आगाज किया जाएगा. आदिवासी-मूलवासी संगठनों की अगुआई कर रहे करमा उरांव ने कहा कि जिस वायदे के साथ हेमंत सरकार राजगद्दी पर आई है, उसे पूरा न होने पर वे चुपचाप बैठने वाले नहीं. राज्य गठन के 21 साल बाद भी यहां के स्थानीय लोगों को स्थानीय नीति का इंतजार है.

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    झारखंड गठन के बाद से उद्योग, व्यापार, रोजगार, नियुक्ति और शिक्षा जैसे क्षेत्र में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता का मसला आज भी नहीं सुलझा पाया है. आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो के अनुसार, खतियान के आधार पर प्राथमिकता की आवाज लगातार बुलंद हो रही है. राज्य में स्थानीय और नियोजन नीति का निर्धारण न होने से राज्य की नियुक्तियों में दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों का बोलबालाहै. अब जबकि हेमंत सोरेन सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है, तो स्थानीय और नियोजन नीति की घोषणा न करना फिर से पुरानी गलतियों को दोहराने जैसा ही होगा. 6 नवंबर को आदिवासी – मूलवासी संगठनों ने तमाम राजनीतिक दलों के साथ परिसंवाद का आयोजन किया है, ताकि स्थानीय-नियोजन नीति को लेकर राजनीतिक दलों की राय सार्वजनिक तौर पर सामने आ सके.

    एक समय अर्जुन मुंडा की अगुआई वाली बीजेपी सरकार से स्थानीय नीति के सवाल पर अलग होने वाली जेएमएम के सामने भी बड़ी चुनौती है. एक तरफ खतियान के आधार पर स्थानीय और नियोजन नीति के निर्धारण का दबाव है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और राजद जैसे सहयोगी दल के वोट बैंक की राजनीति. ऐसे में हेमंत सोरेन सरकार राज्य स्थापना दिवस यानी 15 नवंबर तक क्या निर्णय ले पाती है, यह देखना दिलचस्प होगा.

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