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आदिवासी युवक का दर्द: कलाकारी पर नेता- मंत्री से वाहवाही तो खूब मिली, लेकिन रोजगार नहीं मिला

सुमित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर झारखंड का मोमेंटो उन्हें भेंट करना चाहता है. साथ ही अपने लिए रोजगार की भी बात उनसे करना चाहता है.

सुमित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर झारखंड का मोमेंटो उन्हें भेंट करना चाहता है. साथ ही अपने लिए रोजगार की भी बात उनसे करना चाहता है.

Ranchi News: रांची के रहने वाले सुमित कच्छप के द्वारा बनाये गये हैंडिक्राफ्ट सरकारी कार्यालयों, अधिकारियों और नेताओं के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं. कलाकारी के लिए सालों से उसे खूब तारीफ भी मिलती रही है. लेकिन अब तक रोजगार नहीं मिला.

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रांची. हरियाली की गोद में बसे झारखंड (Jharkhand) में लोकल संसाधनों के जरिए रोजगार के नारे अक्सर दिए जाते हैं. लेकिन सिस्टम की गलियों में हुनरमंदी का गुम होना भी अब शायद नसीब बनता जा रहा है. रांची के रहने वाले आदिवासी युवक सुमित कच्छप, जो चला तो था हुनरमंदी के जरिए हैंडिक्राफ्ट का आसमान छूने, लेकिन बेरोजगारी की कसक ने उसे दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया.

कहते हैं हुनर रोजगार का रास्ता खुद तलाश लेती है, लेकिन रांची के रहने वाले 35 साल के सुमित कच्छप को वो रास्ता आज तक नहीं मिला. स्नातक पास आदिवासी युवक सुमित पिछले 22 साल से हैंडिक्राफ्ट से जुड़े हैं. और अपने आसपास मौजूद बेकार लकड़ियों और बांस को एक खूबसूरत शक्ल देकर उसे जिंदा करने की कोशिश करते हैं. सुमित के बनाये मोनुमेंट सरकारी कार्यालयों, अधिकारियों और नेताओं को भेंट किये जाते हैं. सालों से तारीफ मिल रही है. लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा. यह आदिवासी युवक सरकारी बैंक से लोन लेकर हैंडिक्राफ्ट से जुड़ा अपना खुद का व्यवसाय करना चाहता है. लेकिन पिछले तीन सालों के प्रयास के बाद भी उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है.

सुमित विशेष तौर पर लकड़ी और बांस से ट्राइबल वर्क, वॉल मूरल, वुड स्टैच्यू, प्रतीक चिह्न, शो पीस, प्रोजेक्ट वर्क और पेपर वर्क समेत कई कामों को महारथ के साथ करते हैं. कुछ दिन पहले तक कई स्थानीय युवक हैंडिक्राफ्ट वर्क को सीखने के लिए सुमित के पास पहुंचते थे. लेकिन सुमित की लंबी बेरोजगारी को देखते हुए उनलोगों ने भी इस काम से किनारा कर लिया.



सुमित की भाभी बताती हैं कि सिर्फ रोजगार की वजह से ही अभी तक 35 साल की उम्र होने के बावजूद उसकी शादी नहीं हो पाई है. सुमित की बेरोजगारी पूरे परिवार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है. सुमित ने इतने सालों में जो कुछ भी कमाया, उसे हैंडिक्राफ्ट से जुड़े सामानों को खरीदेने पर ही खर्च कर दिया. अब पैसे की कमी के कारण ऑर्डर मिलने पर ही वह काम करते हैं. सुमित की इच्छा है कि वह खुद एक बार मुख्यमंत्री से मिलकर झारखंड का मोमेंटो उन्हें भेंट करे. साथ ही अपने रोजगार की बात भी वहां तक पहुंचा सके.
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