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झारखंड में अब आदिवासियों को मात्र एक बार बनवाना पड़ेगा जाति प्रमाण पत्र, जीवनभर के लिए मिलेगी मान्यता

झारखंड मंत्रालय में टीएसी की महत्वपूर्ण बैठक हुई.

झारखंड मंत्रालय में टीएसी की महत्वपूर्ण बैठक हुई.

Tribal Advisory Committee: झारखंड मंत्रालय में सोमवार को ट्राइवल एडवाइजरी कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें आदिवासियों को पूरे जीवनकाल के लिये मात्र एक बार जाति प्रमाण पत्र बनाने पर सहमति दी गई.

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रांची. झारखंड में अब आदिवासियों (Tribals) को बार- बार जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) बनाने से छुटकारा मिल गया है. झारखंड मंत्रालय में सोमवार को ट्राइवल एडवाइजरी कमिटी (Tribal Advisory Committee) की महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें आदिवासियों को जीवनकाल के लिये एक बार जाति प्रमाण पत्र बनाने पर अपनी सहमति दी है. वहीं सरना धर्म कोड को लेकर राज्यपाल के जरिये अपनी मांग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के नेतृत्व में टीएसी के सदस्य सरना कोड की मांग और आवश्यकता को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे. आदिवासियों की गलत तरीके से जमीन हस्तांतरण को लेकर टीएसी की उपसमिति बनाई गई है. ये समिति इस मसले पर गंभीरता से जांच कर अपनी रिपोर्ट देगीय. चार घंटे तक चली इस बैठक में कुल 11 एजेंडों पर चर्चा हुई.

बैठक के मुख्य फैसले

झारखंड में आदिवासियों को बार-बार जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाना पड़ेगा. एक बार बनवाने के बाद जीवनभर काम आएगा.

आदिवासी जमीन हस्तांतरण के लिये उपसमिति का गठन. उपसमिति में स्टीफन मरांडी, दीपक बिरुआ और बंधु तिर्की शामिल

सरना धर्म कोड को लेकर राज्यपाल के जरिये अपनी बात पहुंचाने का निर्णय. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुआई में टीएसी के सदस्य सरना कोड के मुद्दे पर राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात

जमशेदपुर में ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाने पर निर्णय, जमीन चिन्हित करने का काम पूरा

प्राइमरी स्तर पर शिक्षक बहाल कर जनजातीय भाषाओं को दुरुस्त करने का निर्णय

राज्य सरकार सजा काट चुके या कोर्ट में अपनी बात को सही तरीके से नहीं रख पाने वाले आदिवासी कैदियों की मदद करेगी

आदिवासी समाज के धार्मिकस्थलों को बचाने और उसे मान्यता देने का निर्णय.

मानव तस्करी को रोकने के लिये कानून बनाने पर सहमति

बैठक में शामिल नहीं हुई बीजेपी 

टीएसी की बैठक में बीजेपी शामिल नहीं हुई. टीएसी उपाध्यक्ष व मंत्री चंपई सोरेन ने बीजेपी के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आदिवासी समाज के विकास और उत्थान की बैठक में शामिल नहीं होकर बीजेपी ने सही नहीं किया.

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