रांची : हार्वर्ड विश्वविद्यालय के ‘पोएट्री एंड पेंट नाइट’ में झारखंड की वंदना टेटे का काव्यपाठ 30 को

वंदना टेटे को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ‘पोएट्री एंड पेंट नाइट’ के कार्यक्रम में काव्यपाठ के लिए आमंत्रित.

वंदना टेटे को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ‘पोएट्री एंड पेंट नाइट’ के कार्यक्रम में काव्यपाठ के लिए आमंत्रित.

वर्चुअल आयोजित हो रहे इस काव्यपाठ में वंदना टेटे के अलावा चेन्नई की दलित कवयित्री मीना कंडासामी और अमेरिका में बस चुकीं बांग्लादेश मूल की अल्पसंख्यक कवयित्री दिलरूबा अहमद भी होंगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2021, 7:57 PM IST
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रांची. झारखंड की आदिवासी कवयित्री वंदना टेटे को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ‘पोएट्री एंड पेंट नाइट’ के कार्यक्रम में काव्यपाठ के लिए आमंत्रित किया है. इस अंतरराष्ट्रीय काव्यपाठ का आयोजन 30 अप्रैल 2021 को भारतीय समय के मुताबिक रात 10:30 से 11:30 बजे तक होगा. गूगल मीट द्वारा वर्चुअल आयोजित हो रहे इस काव्यपाठ में वंदना टेटे के अतिरिक्त और दो महिला कवियों को आमंत्रित किया गया है. जिनमें से एक दक्षिण भारत (चेन्नई) की दलित कवयित्री मीना कंडासामी हैं और दूसरी ढाका (बांग्लादेश) मूल की अल्पसंख्यक कवयित्री दिलरूबा अहमद हैं जो अमेरिका में बस गयी है. ‘पोएट्री एंड पेंट नाइट’ काव्यपाठ का आयोजन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हार्वर्ड साउथ एशियन एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा है. निखिल धर्मराज और सियोना प्रसाद इसके संयोजक हैं. ये जानकारियां झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा के प्रवक्ता केएम सिंह मुंडा ने दीं.

परंपरा से मुठभेड़ करतीं कविताएं

हार्वर्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर आदिवासी कविता की यह पहली उपस्थिति होगी जिसे झारखंड की वंदना टेटे प्रस्तुत करेंगी. तीस साल से अधिक समय से कविता और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय वंदना टेटे को बीते साल दिसंबर में 'शैलप्रिया स्मृति सम्मान' से नवाजा गया था. उनकी कविताएं अपनी परंपरा से पुरजोर मुठभेड़ करती हैं.

झारखंड की चर्चित हस्ताक्षर
वंदना की अब तक एक कविता संकलन ‘कोनजोगा’ प्रकाशित है. लेकिन आदिवासी दर्शन, सौंदर्यशास्त्र और आलोचनात्मक साहित्य पर उनकी कई किताबें प्रकाशित हैं. अभी इसी फरवरी में उनकी सबसे नई किताब ‘ऑरेचर की पत्थरगड़ी और आदिवासियत’ अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्थान नोशन प्रेस से छपी है. पिछले 16 वर्षों वे बहुभाषायी त्रैमासिक पत्रिका ‘झारखंडी भाषा साहित्य अखड़ा’ निकाल रही हैं और ‘अखड़ा संगठन’ की महासचिव हैं. वे बाल पत्रिका ‘पतंग’, सामाजिक पत्रिका ‘समकालीन ताना-बाना’ और खड़िया भाषा की मासिक पत्रिका ‘सोरिनानिङ’ का प्रकाशन-संपादन और झारखंड आंदोलन की पत्रिका ‘समकालीन झारखंड खबर’ की उप-संपादक भी रही हैं. आदिवासी पत्रकारिता के लिए उन्हें झारखंड सरकार का सम्मान, आदिवासी महिला लेखन पर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सीनियर फेलोशिप और पिछले साल झारखंड का प्रतिष्ठित महिला कवयित्री पुरस्कार ‘शैलप्रिया स्मृति सम्मान’ मिल चुका है. देश के जाने-माने साहित्यिक आलोचक और झारखंड आंदोलनकारी डॉ. वीर भारत तलवार ने भी इन्हें गत वर्ष दो लाख रुपये देकर सम्मानित किया है. इसके अतिरिक्त विभिन्न संस्थानों ने भी वंदना टेटे को समय-समय पर उनके लेखन और एक्टिविज्म के लिए सम्मानित किया है.
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