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snake mosquitoes more dangerous than naxalite security forces facing big problem amid monsoon season

जंगल में नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक कौन? जिन्हें सुरक्षाबलों के AK 47 से भी नहीं लगता है डर

एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगे जवानों के लिए मॉनसून कई समस्याएं लेकर आता है.

एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगे जवानों के लिए मॉनसून कई समस्याएं लेकर आता है.

Anti Naxal Operation: नक्सलियों से मुकाबला करने हमारे जांबाज जिंदगी दांव पर लगाकर जंगलों में दिन-रात चौकसी करते हैं. सामान्य दिनों में भी नक्सल विरोधी अभियान आसान नहीं होता, मॉनसून आने के साथ ही यह और चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इस मौसम में जंगल में विषैले जीव-जंतुओं के साथ-साथ मच्छरों से भी जवानों को सावधान रहना होता है. पढ़िए यह रिपोर्ट...

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रांची. मॉनसून की शुरुआत के साथ ही सुरक्षा बलों के सामने नक्सल अभियान चलाने को लेकर एक बड़ी चुनौती देखने को मिलती है. इस मौसम में मच्छरों के आतंक सहित जंगलों में दूसरे विषैले जानवरों और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक जंगल का माहौल हो जाता है. ऐसे में सुरक्षा बलों के द्वारा सफलतापूर्वक अभियान चलाया जा सके, इसे लेकर विशेष ध्यान दिया जाता है.

मॉनसून के साथ ही जंगल में जवानों के लिए बढ़ने वाली समस्याओं का ध्यान रखते हुए पुलिस मुख्यालय गंभीर है. यही वज़ह है अभियान में शामिल जवानों को मच्छरदानी, दवा सहित अन्य साजो-सामान की विशेष व्यवस्था की गई है. झारखंड में नक्सल अभियान में लगे जवानों के लिए नक्सलियों से ज्यादा बड़ा खतरा मच्छर, सांप और बिच्छू साबित हो रहे हैं. जिस झारखंड जगुआर के लड़ाकों से नक्सलियों की पसीने छूटते हैं उन्हें हर मॉनसून में मच्छर और सांप अपना शिकार बना लेते हैं.

ब्रेन मलेरिया तोड़ देता है जवानों की हिम्मत

यह बात गौर करने वाली है कि नक्सल अभियान में जितने जवान शहीद नहीं हुए हैं, उससे कहीं ज्यादा ब्रेन मलेरिया की वजह से अपनी गंवानी पड़ी है. हालांकि इस मानसून में पुलिस मुख्यालय ने मच्छरों और जंगली जानवरों से बचने के लिए अपने जवानों सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाए हैं. एक तरफ झारखंड के नक्सली संगठन बरसात का फायदा उठाकर अपने संगठन के विस्तार की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड पुलिस के  जवान उनके इरादों पर पानी फेरने को लेकर पूरी तरह से तैयार है. इस बार सांप और बिच्छू से बचाव के लिए जवानों को बरसात के पहले ही  क्लोरोक्वीन, प्रीमाक्वीन, एसीटी काम्बी ब्लिस्टर जैसे मेडिसिन उपलब्ध करवा दी गई हैं.

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बीमारियों के कारण गई 69 जवानों की जान

2008 से अब तक झारखंड जगुआर के ही 69 जवान बीमारियों से ग्रसित होकर अपनी जान गंवा चुके हैं. जाहिर है, इसी कारण मॉनसून आते ही पुलिस मुख्यालय गंभीर हो गया है. सभी जवानों को जंगलों में होने वाली समस्या से संबंधित मेडिकल किट, मच्छरदानी, लोशन, उपकरण और केमिकल उपलब्ध करवाए गए हैं, ताकि वे हर परिस्थिति से खुद को सुरक्षित रख सकें.

आईजी अभियान अमोल विणुकान्त होमकर का कहना है कि बरसात के मौसम में अभियान में परेशानी आती है. दुर्गम क्षेत्र के कारण भी नक्सल अभियान चलाने में काफी मुश्किल होती है. ऐसे में जवान कई बीमारियों से ग्रसित होते हैं, जिसे लेकर प्रिवेंटिव मेडिसिन दी जाती है. इसके लिए जिले के एसपी और डीसी को निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि पहले कि तुलना में अब बीमारियों से जवानों की मौत में कमी आई है.

Tags: Anti naxal operation, Jharkhand news

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