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कौन होंगे झारखंड बीजेपी के नये अध्यक्ष? रेस में ये तीन नाम

News18 Jharkhand
Updated: February 3, 2020, 11:54 AM IST
कौन होंगे झारखंड बीजेपी के नये अध्यक्ष? रेस में ये तीन नाम
15 फरवरी तक झारखंड बीजेपी के नये अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है.

नये प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता को लेकर पार्टी के अंदर से अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं. विधायक दल के नेता किसी ट्राइबल फेस को बनाये जाने की संभावना है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी नन ट्राइबल को दी जा सकती है.

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रांची. राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जेपी नड्डा (JP Nadda) के चुनाव के बाद अब सबकी नजरें झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) के नये अध्यक्ष (New President) के मनोनयन पर टिकी हुई हैं. विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ (Laxman Gilua) ने अपने पद से इस्तीफा (Resign) दे दिया. लेकिन अबतक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है. दरअसल पार्टी पहले गिलुवा का विकल्प ढूंढ़ लेना चाहती है. फिर इस्तीफा स्वीकार करेगी.

इस बीच नये प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने प्रदेश के बड़े नेताओं से फीडबैक लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को रिपोर्ट सौंप दी है. अब संभावना जताई जा रही है कि 15 फरवरी तक नये प्रदेश अध्यक्ष का एलान कर दिया जायेगा.

प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता को लेकर पार्टी के अंदर चल रहे मंथन में अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं. विधायक दल के नेता किसी ट्राइबल फेस को बनाये जाने की संभावना है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी नन ट्राइबल को देने की तैयारी है. इन दोनों महत्वपूर्ण पदों की घोषणा में हो रही देरी में कहीं न कहीं जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी की एंट्री की संभावना भी एक वजह है. जेवीएम का बीजेपी में विलय की कवायदें तेज हैं.

प्रदेश अध्यक्ष की रेस में ये तीन नाम  

प्रदेश अध्यक्ष बनने के दौर में कई चेहरे शामिल हैं. पहले नंबर पर दीपक प्रकाश के नाम की चर्चा है. दीपक प्रकाश बीजेपी के प्रदेश महामंत्री है और कार्यालय प्रभारी हैं. उनके पास संगठनात्मक सूझबूझ और कामकाज की जानकारी है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की चुनावी सभाओं का उन्हें संयोजक बनाया गया था.

दूसरे नंबर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राय का नाम चर्चा में है. 1984 में बीजेपी ज्वाइन करने से पहले रविन्द्र राय आरएसएस और एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रहे. संयुक्त बिहार के समय साल 1985 में बगोदर और 1990 में राजधनबार से विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गये. लेकिन साल 2000 में राजधनबार सीट से चुनाव जीते. और बाबूलाल मरांडी की सरकार में मंत्री बने. बाबूलाल मरांडी से  करीबी के चलते ही रविन्द्र राय 2005 से 2008 तक बीजेपी से अलग रहे. हालांकि हाल के दिनों चिट्ठी प्रकरण के बाद उनके रिश्ते बाबूलाल मरांडी से तल्ख हो गये. 10 मार्च 2013 को उन्हें प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया. 2014 में कोडरमा सीट से लोकसभा चुनाव जीते. उसी साल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी सफलता मिली. हालांकि 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में रविन्द्र राय को टिकट नहीं दिया गया.

तीसरा नाम अनंत ओझा का है. अनंत ओझा लगातार दूसरी बार राजमहल से विधायक चुनकर आए हैं. बीजेपी प्रदेश महामंत्री के रूप में और आरएसएस पृष्टभूमि से आने वाले विधायक अनंत ओझा की छवि पार्टी के अंदर अलग है.रिपोर्ट- भुवन किशोर झा 

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First published: February 3, 2020, 11:53 AM IST
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