Jharkhand : कोरोना काल में एक लाख हेल्थ वर्कर करेंगे 'पब्लिक हेल्थ सर्वे'?

झारखंड में घर घर तक होगा स्वास्थ्य सर्वे.

झारखंड में 16 मई तक का आंकड़ा है कि साप्ताहिक पॉज़िटिविटी रेट (Weekly Positivity Rate) कम होकर 7% के आसपास है, लेकिन समस्या यह है कि आधिकारिक रिकॉर्ड्स में ग्रामीण इलाकों में संक्रमण फैलने के आंकड़े पूरी तरह शामिल नहीं हैं.

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    रांची. झारखंड में Covid-19 की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच 'लोक स्वास्थ्य गहन सर्वे' करवाए जाने के आदेश दिए गए हैं. इस सर्वे में शहर हों या गांव, राज्य के हर घर में जाकर यह मालूम किया जाएगा कि कोरोना संक्रमण कितना फैला और उससे कितनी मौतें हुईं. खबरों की मानें तो इस सर्वे को अंजाम देने के लिए एक लाख से ज़्यादा आशा वर्कर, नर्सें और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे.

    आगामी 19 मई से 25 मई के बीच होने वाले इस राज्य स्तरीय गहन सर्वे से जुड़ा निर्देशनुमा एक पत्र राज्य के सभी उपायुक्तों को 14 मई को जारी किया गया है. इसी पत्र के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि राज्य के सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा केस और कोविड मौतें होने का अंदेशा है इसलिए यह सर्वे कराया जा रहा है.

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    क्या कहती है यह चिट्ठी?
    सरकार ने जो चिट्ठी उपायुक्तों को जारी की है, उसके मुताबिक इस सर्वे के ज़रिए कम्युनिटी में वायरस के संक्रमण के फैलने को रोका जा सकेगा. साफ तौर पर 40 साल से ज़्यादा उम्र और पहले से गंभीर रोगों के शिकार लोगों को सर्वे में प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश हैं. यह भी कहा गया है कि कफ, बुखार, बदन दर्द और स्वाद खोने जैसे लक्षण दिखते ही रैपिड एंटीजन टेस्ट किए जाएं.

    कैसे होगा सर्वे?
    इस सर्वे से जुड़े निर्देशों में सरकार ने कहा कि 7 दिनों में 7 तरह के टास्क को अंजाम दिया जाएगा. वहीं, सर्वे करने वाले गर्भवती महिलाओं को ट्रैक करने के साथ ही बच्चों का चेकअप भी करेंगे. इस सर्वे के बारे में कई माध्यमों से जागरूकता भी फैलाई जाएगी. इस सर्वे के लिए हेल्थवर्कर घर घर जाकर लोगों के नाम और डिटेल्स दर्ज करेंगे.

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    झारखंड के गहन हेल्थ सर्वे में करीब 1 लाख स्वास्थ्यकर्मी लगाए जाएंगे.


    झारखंड में कुल 4402 पंचायतें ​हैं, जो राज्य के सभी 24 ज़िलों के 35,000 से ज़्यादा गांवों में फैली हुई हैं. यहां आशा सेविकाओं सहित एक लाख स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से सर्वे को अंजाम देने की बात राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण सिंह के पत्र में कही गई है. शहरी क्षेत्रों में आशा वर्करों के साथ ही महिला आरोग्य समिति के सदस्यों की नियुक्ति इस सर्वे के लिए की जाएगी.

    क्यों है सर्वे की ज़रूरत
    मीडिया में इस तरह की खबरें थीं कि झारखंड के गांवों के कुछ मुखियाओं ने आरोप लगाए थे कि लोग बुखार के बाद मर रहे हैं लेकिन टेस्ट के अभाव में पता नहीं चल पा रहा कि मौत की सही वजह क्या रही या टेस्ट में देरी से मौतें बढ़ रही हैं. इस पर विपक्ष ने झारखंड सरकार पर निशाना साधा था.

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    रेकार्ड बताते हैं कि मार्च से 14 मई के बीच राज्य में कोविड 19 से होने वाली मौतें 4 गुना बढीं. इसके मद्देनज़र सरकार अब जो सर्वे करवा रही है, उसमें दूरस्थ इलाकों तक मरीज़ों की स्क्रीनिंग, कोरोना केस मिलने पर त्वरित इलाज, पंचायतों में आइसोलेशन सेंटर बनाने के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज और टीके देने की व्यवस्था करना प्राथमिकता से शामिल होगा.