विश्व पर्यावरण दिवस : विकास के नाम पर बिगाड़ दी धरती की सेहत

झारखंड में विकास के नाम पर लाखों हरे भरे पेड़ काट दिए गए. कागजों पर एक कटे पेड़ की जगह 10 नये पौधे लगाने की औपचारिकता भी पूरी कर ली गई. पर, हकीकत में नए पौधे पेड़ बने या नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं है.

Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: June 5, 2019, 6:39 PM IST
विश्व पर्यावरण दिवस : विकास के नाम पर बिगाड़ दी धरती की सेहत
झारखंड में विकास के नाम पर लाखों की संख्या में हरे भरे पेड़ काट दिए गए.
Upendra Kumar
Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: June 5, 2019, 6:39 PM IST
Beat Air Pollution के वैश्विक थीम के साथ आज विश्व भर में पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है. प्रदूषण को कम करने तथा धरा को हरा भरा बनाए रखने के लिए आज सरकारी-गैरसरकारी संगठन गोष्ठी सेमिनार कर रहे हैं. पर इस सबके बीच यह एक सच्चाई है कि विकास के नाम पर हमने खुद अपनी धरती की सेहत बिगाड़ दी है. झाड़-जंगलों से भरा हमारा हरा भरा झारखंड अब प्रदूषित नदियों, वायु प्रदूषण से लेकर आणविक प्रदूषण के लिए जाना जाने लगा है. अब तो सत्ता और विपक्ष दोनों पक्ष के नेता पर्यावरण संरक्षण को बड़ा मुद्दा मानकर नीति बनाने की मांग करने लगे हैं.

जमीन, हवा, नदी सभी प्रदूषित

आज विश्व पर्यावरण दिवस को अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनाइटेड नेशन ने इस बार वायु प्रदूषण को परास्त करने का थीम रखा है. आज के दिन तपती धरती और पेयजल की घोर संकट से जूझते विश्व में झारखंड की स्थिति भी ठीक नहीं है. कभी संयुक्त बिहार के समय ग्रीष्मकालीन राजधानी रही रांची का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है. गर्मी के चलते ताल तलैया सूख रहे हैं. बढ़ती आबादी, विकास के लिए सड़कों के विस्तार और औद्योगिकरण के नाम पर राज्य की जमीन, हवा, नदी सब प्रदूषित हो चुकी है. रांची विश्वविद्यालय के पर्यावरणविद डॉ. नीतीश प्रियदर्शी प्रदूषण को बड़ी समस्या मानते हुए अलर्ट होने की सलाह देते हैं.

काट दिए गए लाखों हरे भरे पेड़

झारखंड में विकास के नाम पर लाखों की संख्या में हरे भरे पेड़ काट दिए गए. कागजों पर एक कटे पेड़ की जगह 10 नये पौधे लगाने की औपचारिकता भी पूरी कर ली गई. पर, हकीकत में नए पौधे पेड़ बने या नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं है. सीवरेज के गंदे पानी ने नदियों के पानी को काला कर दिया है. करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद राजधानी की लाइफलाइन हरमू और स्वर्णरेखा नदी दम तोड़ रही है. पर्यावरण में प्रदूषण और कम बारिश के चलते ताल तलैया भी सूख रहे हैं. राज्य में प्रदूषण को लेकर कई शोध करने तथा रिपोर्ट दिल्ली सरकार तक को भेजने वाले राजनेता एवं एक्टिविस्ट गौतमसागर राणा आज की स्थिति पर चिंता जताते हुए पर्यावरण और प्रदूषण को मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनाने की मांग करते हैं.

प्रदूषित दामोदर नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अभियान चलाने वाले मंत्री सरयू राय भी झारखंड में पर्यावरण के संरक्षण के नाम पर दिखावटी कार्यक्रम और हर साल करोड़ों रुपये दिखावा के नाम पर खर्च किए जाने से खुश नहीं हैं. वह व्यंग्य कसते हुए कहते हैं कि कम से कम पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए दिखावा नहीं बल्कि धरातल पर काम होना चाहिए. पर्यावरण एक गंभीर विषय है और इसका प्रभाव हर किसी पर पड़ता है. ऐसे में जरूरत है कि सरकार, गैरसरकारी संगठनों के साथ-साथ हर झारखंडवासी आज के दिन संकल्प ले कि वह न सिर्फ अपनी धरा को प्रदूषणमुक्त रखेगा बल्कि दूसरों को भी पर्यावरण को बचाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

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First published: June 5, 2019, 6:39 PM IST
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