झारखंड का 'ही-मैन' दांतों से खींच लेता है 3 ट्रक, मगर Corona संकट ने बनाया डिलिवरी बॉय
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झारखंड का 'ही-मैन' दांतों से खींच लेता है 3 ट्रक, मगर Corona संकट ने बनाया डिलिवरी बॉय
(सांकेतिक तस्वीर)

रांची के ओरमांझी में रहने वाले राजेन्द्र साहू ने दांत से 5 किलो का वजन उठाने से लेकर 3 ट्रकों को खींचने तक का कारनामा किया, मगर COVID-19 संकट के कारण आजकल वे स्विगी (Swiggy) के डिलिवरी बॉय की नौकरी कर रहे हैं.

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रांची. झारखंड का एक युवक अपने कारनामों से वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) बना चुका है. मगर COVID-19 संकट की वजह से इन दिनों गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर है. जी हां, झारखंड के 'ही-मैन' राजेन्द्र साहू की दांतों में इतनी ताकत है कि वह 3 ट्रकों को एक साथ खींच सकते हैं. लेकिन किस्मत का खेल देखिए, आज वह ऑनलाइन आर्डर (Online Order) पर घर-घर खाना पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉय की नौकरी करने को मजबूर हैं. हालांकि जिंदगी की इस जद्दोजहद के बीच राजेन्द्र का हौसला डिगा नहीं है. उनकी इच्छा है कि हर हाल में उनका नाम गिनीज बुक (Guinness Book) में दर्ज हो.

बूढ़े मां-बाप की जिम्मेदारी कंधे पर 

राजधानी के ओरमांझी इलाके में रहने वाले राजेन्द्र साहू कभी अपनी मेहनत की बदौलत लोगों के दिलों पर राज करते थे. 5 किलो का वजन दांत से उठाने से शुरू हुआ सफर 3 ट्रकों को दांत से खींचने तक पहुंचा. इसके लिए नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ. कई संस्थाओं ने राजेन्द्र को सम्मानित भी किया. लेकिन जिंदगी की इम्तिहान में सम्मान से काम नहीं चलता. राजेंद्र मुफलिसी के दौर से गुजर रहे हैं. बूढ़े मां-बाप की जिम्मेदारी उनके कंधे पर है. जिम्मेदारी के इस बोझ को उठाने के लिए राजेन्द्र स्विगी का डिलिवरी बॉय बन गये हैं. फुर्सत के पल में अपने खेतों में काम करते हैं. यह सबकुछ बस दो वक्त की रोटी जुगाड़ने के लिए है.



ऐसे मिली प्ररेणा 



राजेन्द्र साहू का कहना है वर्तमान सरकार से उन्हें बहुत उम्मीदें हैं. उनके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जरूर कुछ करेंगे. राजेन्द्र बताते हैं कि एक बार उन्होंने एक लड़की के बारे में जाना कि वह अपने बालों से ट्रक को खींच लेती है. इस खबर को पढ़कर उन्हें दातों से ट्रक खींचने की प्रेरणा मिली. फिर मुकाम पाने के लिए मेहनत का सिलसिला चल पड़ा.

राजेन्द्र के चचेरे भाई बताते हैं कि राजेन्द्र ने काफी मेहनत कर इस उपलब्धि को पाया है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण कोई उनकी मदद नहीं कर पा रहा. हालांकि उन्हें अपने भाई पर गर्व है.

मुख्यमन्त्री हेमंत सोरेन ने सत्ता संभालने के बाद कहा था कि सूबे के खिलाड़ियों के लिए जो भी सरकार से बन पड़ेगा, वो किया जाएगा. राजेन्द्र सीएम के इसी वादे पर मदद की आस लगाये हुए हैं. देखते हैं कब सरकार की नजर राजेन्द्र पर पड़ती है.

इनपुट- ओमप्रकाश

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First published: June 6, 2020, 7:41 AM IST
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