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Lockdown: फूलों के साथ मुरझा रही किस्मत! जानिए झारखंड के युवा किसानों का दर्द

Lockdown: फूलों के साथ मुरझा रही किस्मत! जानिए झारखंड के युवा किसानों का दर्द

फूलों की खेती करने वाले किसान इस बार कोरोना की मार झेल रहे हैं.

फूलों की खेती करने वाले किसान इस बार कोरोना की मार झेल रहे हैं.

रांची में अनगड़ा प्रखंड के हेसातु गांव में कई एकड़ में युवा किसानों (Young Farmers) ने फूलों की खेती (Flower Farming) की है. लेकिन लॉकडाउन (Lockdown) के चलते इनके फूलों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं.

रांची. लॉकडाउन (Lockdonw) के चलते मंदिर में पूजा-पाठ से लेकर शादी की शहनाई तक, सब बंद हैं. ऐसे में फूलों की खेती (Flower Farming) कर अपनी किस्मत को संवारने वाले झारखंड के युवा प्रगतिशील किसान (Young Farmers) बेचारगी के आलम में हैं. पॉली हाउस में गुलाब, जड़बेरा समेत अन्य फूल खिलकर तैयार हैं. लेकिन उनका कोई खरीदार नहीं है. धीरे-धीरे अब ये फूल खराब होने लगे हैं. और बुझे मन किसान इन सुंदर और सुगंधित फूलों को फेंकने को मजबूर हैं.

सरकारी मदद नहीं मिली, तो खेती छोड़ सकते हैं युवा किसान

रांची में अनगड़ा प्रखंड के हेसातु के श्याम सुंदर बेदिया अकेला वैसे फूल उत्पादक किसान नहीं है, जिनकी कमर कोरोना बंदी ने तोड़ दी है. इजरायल में प्रशिक्षण लेकर इन जैसे सूबे के कई किसानों ने फूलों की खेती की है. रंग बिरंगे गुलाब और जड़बेड़ा के रूप में इनके फसल तैयार भी हैं. लेकिन लॉकडाउन में इन फूलों के खरीदार नहीं मिल रहे. चार से सात रुपये में जो गुलाब बिक जाया करता था, आज उसे कोई खरीदने वाला नहीं है. स्थिति ये है कि अगर सरकार ने आगे बढ़कर इनकी मदद नहीं की, तो ये लोग अगली बार से फूलों की खेती छोड़ देंगे.

श्यामसुंदर बेदिया और सुनील बेदिया जैसे युवा किसान कहते हैं कि इस सीजन में हर दूसरे दिन 200 से 250 फूल खिलते थे. इन्हें खेत से ही 5 से 7 रुपये की दर से फूल व्यवसायी खरीदते थे. पर अभी जबकि शादी, पूजा-पाठ, पार्टी या अन्य समारोह सब बंद हैं, तो इन फूलों को पूछने वाला कोई नहीं है.

फूलों का बीमा नहीं करतीं बीमा कंपनियां

कृषि पदाधिकारी भी मानते हैं कि फूल की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कैसे उनकी मदद की जा सकती है, इसका रास्ता खोजा जा रहा है. इन फूल उत्पादकों की नुकसान की भरपाई फसल बीमा से भी नहीं हो सकता, क्योंकि अभी तक बीमा कंपनियां फूलों का बीमा नहीं करती. रांची के कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा कहते हैं कि कृषि विभाग चैम्बर ऑफ कॉमर्स से बात कर रहा है कि कैसे फूल की खेती करने वाले किसानों की मदद की जा सके. सरकार की योजना है कि अन्य फसलों की तरह फूलों की भी बीमा कराई जाए.

गुलाबकन्द भी नहीं बना सकते किसान

जब गुलाब के फूलों के खरीदार ही नहीं हैं. ऐसे में किसान चाहकर भी इससे गुलकंद नहीं बना सकते, क्योंकि शादी और अन्य आयोजनों के लिये डच रोज का डिमांड होता है, जबकि गुलकंद देशी गुलाब से बनता है. वहीं इससे गुलाब जल बनाने की पद्धति इन किसानों को पता नहीं है. ऐसे में किसान के सामने इन फूलों को फेंकने के अलावा कोई और चारा नहीं है.

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Tags: Jharkhnad news, Lockdown, Ranchi news

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