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किसी भी दिन बंद हो सकता है रिम्स का किचेन! इंडोर में भर्ती 1400 मरीजों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

रिम्स की किचन में काम करने वाले कर्मचारियों को कई महीने से वेतन नहीं मिल रहा है.

रिम्स की किचन में काम करने वाले कर्मचारियों को कई महीने से वेतन नहीं मिल रहा है.

झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIMS Hospital) में भर्ती मरीजों को खाना उपलब्ध कराने वाले कर्मियों को 2-3 महीने से वेतन (Salary) नहीं मिला है. अब रिम्स और एजेंसी के बीच चल रही खींचतान से यहां की किचेन बंद होने वाली है.

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रांची. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIMS Hospital) में भर्ती मरीजों को खाना उपलब्ध कराने वाले कर्मियों को 2-3 महीने से वेतन (Salary) नहीं मिला है. किचेन (Kichen) चला रही एजेंसी ने रिम्स से बकाया मिलने पर ही वेतन भुगतान करने की बात कही है. वहीं रिम्स के पोषण एवं आहारिकी के हेड इसे दवाब बनाने की कोशिश बता रही हैं. एजेंसी और रिम्स के बीच चल रहे इस विवाद (Dispute) के कारण खाना बनाने वाले कर्मी पिस रहे हैं. आगे इसके चलते रोगियों को भी परेशानी हो सकती है.

क्या कहते हैं किचेन कर्मी
रिम्स के मरीजों के लिए खाना बनाने वाली और उसे मरीजों को बेड तक पहुंचाने वाली स्वर्णी देवी और  संदीप का कहना है कि महंगाई के इस दौर में तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. स्कूल से बकाया फीस जमा करने का मैसेज आ रहा है तो अब किराना वाले दुकानदार भी तकादा कर रहे हैं. दवा के साथ-साथ पोषण तत्वों से युक्त भोजन की व्यवस्था रिम्स में भर्ती मरीजों को मिले इसके लिए रिम्स में भर्ती मरीजों के सुबह में नाश्ते, दोपहर और रात के खाने की व्यवस्था रिम्स करता है.

रिम्स के किचेन में खाना बनाने वाली एजेंसी का 80 फीसदी स्टाफ खाना बनाने से लेकर एक-एक मरीज के बेड तक भोजन पहुंचाने का काम करते हैं, ताकि मरीजों को समय पर भोजन मिल सके. अब इन्हीं कर्मियों को दो से 3 महीने से वेतन नहीं मिला है. हर दिन 1400 से ज्यादा मरीजों को भोजन बनाकर उपलब्ध कराने वाले कर्मियों का दर्द उनके परिवार को नहीं चला पाने का है .

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क्या कहना है एजेंसी का

दरअसल पहले रिम्स अपनी व्यवस्था से मरीजों को भोजन उपलब्ध कराता था. लेकिन, पूर्व की सरकार ने रिम्स किचेन का जिम्मा प्राइम नाम की एजेंसी को दे दिया था. अब एजेंसी के प्रबंधक जयप्रकाश का कहना है कि पेमेंट नहीं होने के बावजूद जहां तक संभव हुआ उसने अपने कर्मचारियों को तनख्वाह दिया अब 04 करोड़ रुपए बकाया है और एजेंसी इस हाल में नहीं है कि भुगतान कर सके.

दवाब बनाने के लिए रचा जा रहा है षड्यंत्र
रिम्स का किचेन चलाने वाली एजेंसी की बड़ी रकम बकाए के सवाल पर आहारिकी विभाग की हेड मीनाक्षी ने इसे दवाब बनाने की रणनीति बताते हुए कहा कि अभी कुछ महीने पहले ही कुछ महीनों का भुगतान किया गया है. वहीं पूरे मामले पर रिम्स अधीक्षक ने चुप्पी साध ली है. जिस चंद महीनों के बकाए भुगतान की बात आहारिकी की हेड कह रही हैं उसे एक साल से ज्यादा दिनों तक मरीजों को उपलब्ध कराए गए भोजन के बकाए की राशि का अंश बताते हुए एजेंसी का कहना है कि किराना और सब्जी फल, अंडा वालों का भुगतान करने के बाद कोई राशि बची नहीं जिससे कर्मियों को भुगतान कर सकें. ऐसे में सवाल यह है कि जब रिम्स को फंड के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना होता है तब 11- 11 महीने तक भुगतान नहीं होने का खामियाजा तो वही गरीब कर्मचारी भुगतते हैं जो बेहद कम वेतन पर मरीजों का भोजन बनाते और उनके पास तक पहुंचाते हैं.

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