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साहिबगंज को निगलने के लिए उतावली हुई गंगा, कभी भी मिट सकते हैं ये 7 मोहल्ले

साहिबगंज को निगलने के लिए उतावली हुई गंगा, कभी भी मिट सकते हैं ये 7 मोहल्ले

गंगा के तेज कटाव को देखते हुए पुराने साहिबगंज के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है.

गंगा के तेज कटाव को देखते हुए पुराने साहिबगंज के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है.

Sahebganj News: साहिबगंज शहर से सटे एक किमी का तटीय क्षेत्र गंगा कटाव की जद में आ गया है. इससे पुराने साहिबगंज का ओझा टोली, धोबी टोला, मलाही टोला, हरिजन टोला, सूर्यदेव घाट व शीतल घाट में स्थित सैकड़ों घर कभी भी गंगा में समा सकते हैं. शुक्रवार को सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की चाहरदीवारी गंगा की भेंट चढ़ गयी.

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    रिपोर्ट- मिथिलेश कुमार सिंह

    साहिबगंज. झारखंड का साहिबगंज जिला गंगा के कटाव से त्रस्त है. दियारा और ग्रामीण तटीय इलाकों के बाद अब पिछले 20-25 दिन से गंगा का कटाव शहर के तटीय इलाकों में भी शुरू हो गया है. साहिबगंज शहर से सटे एक किमी का तटीय क्षेत्र गंगा कटाव की जद में आ गया है. इससे पुराने साहिबगंज का ओझा टोली, धोबी टोला, मलाही टोला, हरिजन टोला, सूर्यदेव घाट व शीतल घाट में स्थित सैकड़ों घर कभी भी गंगा में समा सकते हैं. शुक्रवार को सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की चाहरदीवारी गंगा की भेंट चढ़ गयी.

    दो दिन पूर्व उपायुक्त रामनिवास यादव और राजमहल विधायक अनंत ओझा ने कटाव प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया था. इस दौरान उन्होंने सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को बचाने के लिए यथाशीघ्र काम शुरू करने का निर्देश गंगा पंप नहर कार्यालय के इंजीनियर को दिया था, लेकिन कार्य शुरू करने से पहले चाहरदीवारी गिर गयी.

    साहिबगंज के समीप बहने वाली गंगा के भौगोलिक स्वरूप की बात की जाए, तो पिछले कई वर्षों में इसमें कई बदलाव हुए हैं. आज से ठीक 8 वर्ष पहले उत्तर वाहिनी गंगा सीधे रामपुर दियारा के पश्चिमी मुहाने को छूते हुए साहिबगंज में प्रवेश करती थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद उक्त मुहाना बंद होने से रामपुर दियारा के पश्चिमी छोर से लेकर मदनशाही तक गोखुर झील का निर्माण हो गया था. इसके बाद इस वर्ष गंगा ने फिर अपना स्वरूप बदला है. गंगा ने रामपुर दियारा के पूर्वी इलाके के बड़े भूभाग को काट दिया.

    रामपुर दियारा के एक हिस्से को काटने के बाद गंगा ने शहर के मलाही टोला के सामने लगभग 300 बीघा जमीन लील ली. इसका नतीजा ये हुआ कि गंगा अब मनिहारी से मलाही टोला के सामने उत्तरवाहीन हो गयी. अब गंगा की सीधी धार ओझा टोली से लेकर मदनशाही तक के तटीय इलाकों से सीधे टकरा रही है.

    स्थानीय अधिवक्ता राजेश सिंह और ग्रामीण दशरथ ने बताया कि अगर समय रहते इस प्राकृतिक आपदा को रोकने की कोशिश नहीं हुई, तो गंगा शहर में घुस जाएगी. इससे पुराने साहिबगंज, चानान और कबूतरखोपी का इलाका गंगा में समा जाएगा.

    Tags: Ganga, Jharkhand news

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