VIDEO: साहेबगंज में सिल्क को मिलेगी अब नई पहचान
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भगैया के कच्चे माल को भागलपूर में तैयार कर भागलपूरी सिल्क के नाम से किया जाएगा प्रमोट.

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साहेबगंज में बुनकरो द्वारा तैयार सिल्क को अब एक नई पहचान मिलेगी. साहेबगंज में कोकून का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है. भगैया को विशेषकर रेशम नगर के रूप में जाना जाता है. भगैया के कच्चे माल को भागलपूर में तैयार कर भागलपूरी सिल्क से जाना जा रहा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन के पहल के बाद बुनकरों की समस्या न सिर्फ दूर होगी बल्कि उनकी मेहनत को अब नई पहचान भी मिलेगी. कई समस्याओं से जूझ रहे बुनकरों को कई सुविधाएं भी मिलेंगी. इसके साथ ही झारक्राफ्ट से नए बाजार को नए सिरे से जोड़ा जाएगा.

भगैया के बुनकरो द्वारा बनाई गई उत्पादो को भागलपूर में तैयार कर उसे भागलपूरी सिल्क के नाम से जाना जाता है, लेकिन साहेबगंज के भगैया को कोई पहचान नहीं मिलती थी. इसके साथ ही बुनकरों को उचित राशि भी नहीं मिल पाती थी. इतना ही नहीं बुनकरों को समय समय पर काम भी नहीं मिलता था.

इसके साथ ही झारक्राफ्ट के पदाधिकारियो की कार्यशैली के कारण कई बुनकर समितियां बेजान सी होने लगी है. साहेबगंज के डीडीसी नैंसी सहाय ने बताया कि भगैया में बनुकर द्वारा बनाए गए उत्पादो के लिए प्रशासन ने भगैया सिल्क को नया रूप दिलाने का प्रारुप तैयार किया है.



भगैया में बुनकरो के उत्पाद भागलपूर में अंतिम रूप दिया जा रहा है. जिसे लोग भागलपूरी सिल्क जानते हैं. प्रशासन ने साहेबगंज में बुनकरों के सिल्क को भागीरथी सिल्क के नाम से पहचान दिलाने की योजना बनाई है.
नैंसी सहाय ने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद भी बुनकरों को उचित राशि नहीं मिल पाती है. इसका कारण बुनकरों को सही बाजार न मिल पाना है.
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