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फरक्का बराज के चलते साहिबगंज में हर साल आती है बाढ़, इस वजह से कम हुई गंगा की गहराई

साहेबगंज में फरक्का बराज की वजह से हर साल बाढ़ आती है.

साहेबगंज में फरक्का बराज की वजह से हर साल बाढ़ आती है.

Flood in Sahebganj: भू-गर्भशास्त्रियों का कहना है कि साहिबगंज में गंगा में गाद फरक्का बैराज की वजह भरा है. इसलिए हर साल बाढ़ आती है और जलीय जीव को भी खतरा है.

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    रिपोर्ट- मिथिलेश कुमार सिंह

    साहिबगंज. गंगा (Ganga) स्वच्छ रहे और अविरल बहे, इसके लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगा परियोजना (Namami Ganga Project) चलायी. झारखंड के एकमात्र जिले साहिबगंज से गुजरने वाली गंगा की गहराई सिलिटेशन की वजह से पहले की तुलना में काफी कम हो गयी है. सिलिटेशन का मुख्य कारण फरक्का बराज है.

    दरअसल बिहार में गंगा में गंडक, बूढी गंडक, कमला, बलान, सोन, पूनपुन और कोशी आकर मिलती है. इन नदियों द्वारा गाद भी आता है. वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के फरक्का में वर्ष 1975 में बने बैराज की वजह से गंगा की अविरलता अवरूद्ध हो गयी. नतीजा सिलिटेशन होना शुरू हो गया और गंगा धीरे धीरे गाद से भर गयी. परिणामस्वरूप गंगा सहित उसकी सहायक नदियों के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश के बाद पानी ओवरफ्लो करने लगता है और बिहार के बक्सर से लेकर झारखंड के साहिबगंज तक बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं. नमामि गंगे योजना के तहत सिलिटेशन हटाने का काम किया गया था, लेकिन फरक्का बैराज की वजह से बहाव मार्ग अवरूद्ध होने से लाभ नहीं हुआ.

    भू-गर्भशास्त्री प्रो रंजीत सिंह का कहना है कि साहिबगंज में गंगा में गाद फरक्का बैराज की वजह भरा है. इससे जलीय जीव को भी खतरा है.

    फरक्का बैराज के पास एक कनाल है. उस कनाल से पश्चिम बंगाल में सिंचाई होता है. बैराज के लेबल में पानी होने के बाद कनाल में स्वत: पानी जाता है. इस लेबल को बनाये रखने के लिए बैराज का आधा से अधिक मुहाना बंद रहता है. इस कारण गंगा का पानी यहां थोड़ा थम जाता है. हालांकि गंगा में बाढ़ को देखते हुए फरक्का बैराज के कुल 109 फाटक को लगभग 8 दिन पूर्व खोल दिया गया. इससे लगभग 2 लाख क्यूसेक पानी रोजाना डिस्चार्ज हो रहा है. तभी बिहार तथा झारखंड के साहिबगंज में बाढ़ से लोगों को राहत मिली है.

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