बेटियों ने हड़प ली संपत्ति, अस्पताल में पिता लड़ रहा मौत से जंग
Sahebganj News in Hindi

साहेबगंज सदर असस्पताल के मरीज वार्ड में बेड पर लाचार पड़े इस शख्स का दर्द सुनकर हर किसी का दिल पिघल जाएगा. लोग ये भी कहते हैं कि जवानी के दिनों में जिस पिता ने अपने दो बोटियों पर पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हें हर दुख से दूर रखा. आज उसे ही कोई सहारा देने वाला नहीं है.

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झारखंड के साहेबगंज में दामोदर चौधरी को अपनों का साथ नहीं मिला और न ही सरकारी सेवाओं का लाभ मिल पा रहा है. उन्हें अब ईश्वर पर ही भरोसा रह गया है. बता दें कि दामोदर चौधरी खून की कमी से जुझ रहे हैं. गैरतलब है कि दो बेटियों के बाप का अब कोई सहारा नहीं. बेटियां इनकी जमीन और सम्पति अपने नाम करा चुकी हैं. उन्हें अब अपने बाप से कोई सरोकार नहीं है.

एक मसीहे का है इंतजार

दरअसल साहेबगंज सदर असस्पताल के मरीज वार्ड में बेड पर लाचार पड़े इस शख्स का दर्द सुनकर हर किसी का दिल पिघल जाएगा. लोग ये भी कहते हैं कि जवानी के दिनों में जिस पिता ने अपने दो बोटियों पर पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हें हर दुख से दूर रखा. आज उसे ही कोई सहारा देने वाला नहीं है. उम्र के इस पड़ाव पर दामोदार सदर अस्पताल साहेबगंज के बेड पर मौत और जिंदगी से जंग लड़  रहे हैं. ना कोई देखने वाला ना कोई पूछने वाला. B पाजिटीव खून की कमी से जिन्दगी की भीख मांग रहे दामोदर को खून की सख्त जरूरत है. इंसानियत तलाश रहे दामोदर को बस अब मसीहे का इंतजार है जो उन्हें खून देकर उनकी बचे दिन की  जिन्दगी दे सके.



ब्लड बैंक में नहीं है खून
वहीं साहेबगंज स्वास्थ्य प्रबंधन भी हाथ खड़े कर चुका है.  सिविल सर्जन कहते है कि है जन सहयोग से ही ब्लड बैंक में खून मिलता है. इसके लिए समय-समय पर संगठन की ओर से कैम्प लगाकर ब्लड जमा किए जाते है. अभी हालात ऐसे है कि ब्लड बैंक में एक कतरा भी खून नहीं है. दामोदर चौधरी के दर्द के सामने सरकारी मशीनरी ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. अब दामोदर को बस एक मसीहे का ही इंतजार है, जो खून देकर उन्हें नई जिन्दगी दे सके.

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