मां ने जन्म देने के बाद मौत के हवाले किया, अब 40 लोग नई जिंदगी देने को आगे आए
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मां ने जन्म देने के बाद मौत के हवाले किया, अब 40 लोग नई जिंदगी देने को आगे आए
नवजात को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के चाइल्ड केयर यूनिट में रखा गया है.

सरायकेला थानाक्षेत्र के तितिरबिला पुलिया के पास मदर्स डे के दिन नवजात (Newborn)फेंका हुआ मिला. पिछले तीन दिन में 40 लोगों ने इस बच्चे को गोद लेने (Adopt) की इच्छा जताई है.

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सरायकेला. मदर्स डे यानी 10 मई की रात को सरायकेला में ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई. सरायकेला थानाक्षेत्र के तितिरबिला पुलिया के पास सुनसान स्थान पर नवजात (Newborn) फेंका हुआ मिला. निर्दयी मां ने इसे जन्म देने के बाद मौत के हवाले कर दिया, लेकिन अब 40 लोग इस बच्चे को नई जिंदगी देने के लिए आगे आए हैं. इनसभी ने इस नवजात को गोद लेने (Adopt) की इच्छा जताई है.

दरअसल 10 मई की रात किलकारी सुनकर एक राहगीर ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को नवजात के बारे में सूचना दी. जिसके बाद पुलिस ने नवजात को मौके से अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल में आवश्यक टीका देने के बाद नवजात को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के चाइल्ड केयर यूनिट में रखा गया है.

40 लोगों ने गोद लेने की जताई इच्छा 



इस बाबत न्यूज-18 पर खबर दिखाये जाने के बाद अब इस नवजात को गोद लेने के लिए लोग आगे आ रहे हैं. रोज जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी के पास इस सिलसिले में फोन आ रहे हैं. पिछले तीन दिन में चालीस लोगों ने नवजात को गोद लेने की इच्छा जतायी है. गोद लेने की इच्छा जाहिर करने वाले सरायकेला के अशोक कुमार ने बताया कि उनकी शादी को आठ साल हो गये, मगर उनका कोई बच्चा नहीं है. वह एक बच्चा गोद लेना चाहते हैं. इस नवजात के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने बाल संरक्षण विभाग से गोद लेने की इच्छा जताई है.
गोद लेने के लिए ये है नियम

समेकित बाल संरक्षण योजना तथा किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत किसी नवजात के मिलने पर दो महीना तक बच्चे के बायोलॉजिकल माता-पिता को खोजने का प्रावधान है. दो महीने में अगर बच्चे के माता-पिता नहीं मिलते हैं, तो बच्चे को लीगली फ्री करते हुए गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. गोद लेने के इच्छुक व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. फिर स्पेशल एडाप्टेशन एजेंसी की टीम द्वारा बच्चे के बेहतर भविष्य को लेकर योग्य माता-पिता के चयन हेतु इच्छुक दंपत्ति के घर विजिट किया जाता है. जिसमें परिवार के व्यवहारिक, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन कर बच्चे को दिया जाता है.

जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष ठाकुर ने बताया कि फिलहाल नवजात के बायोलॉजिकल माता पिता की खोज जारी है. अगर दो महीने की खोजबीन में वे नहीं मिलेंगे, तो बच्चे को बाल कल्याण समिति द्वारा लीगली फ्री घोषित किया जाएगा. फिर गोद लेने की प्रक्रिया शुरू होगी. करीब चालीस लोग इन नवजात को गोद लेने की इच्छा जताई है. सभी का रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है.

रिपोर्ट- विकास कुमार

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