श्रमिकों की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर लेबर एक्ट के तहत कार्रवाई होगी
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श्रमिकों की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर लेबर एक्ट के तहत कार्रवाई होगी
राकेश कुमार सिन्हा श्रम अधीक्षक, सरायकेला खरसावां

रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के सही उम्र का पता लगाने के लिए अब मेडिकल जांच कराई जाएगी. मेडिकल जांच रिपोर्ट आने पर अगर उनकी उम्र 18 वर्ष से कम होगी तब बाल श्रम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

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सात अगस्त की देर रात सरायकेला जिला के गम्हरिया थानांतर्गत सुधा डेयरी में बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा आरती कुजूर के नेतृत्व में बचपन बचाओ आंदोलन व जिला प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में रेस्क्यू किए गए छह श्रमिकों की अब मेडिकल जांच कराई जाएगी. 18 वर्ष से कम होने की आशंका के ऊहापोह के बीच बाल कल्याण समिति ने नियोजक को मेडिकल बोर्ड से जांच कराकर मेडिकल सर्टिफिकेट देने को कहा है.

छापेमारी किए जाने की रात जब छह श्रमिकों को रेस्क्यू किया गया तब उनके आधार नंबर को देख इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वे 18 वर्ष से कम के हैं. सभी श्रमिकों को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया था. फिर समिति द्वारा उन श्रमिकों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया.

इस बारे में जानकारी देते हुए श्रम अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि जांच के दौरान श्रमिकों को कम मजदूरी देने की बात सामने आई है. इसको लेकर श्रम विभाग द्वारा नियोजक को नोटिस दिया गया है. वहीं रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के सही उम्र का पता लगाने के लिए अब मेडिकल जांच कराई जाएगी. मेडिकल जांच रिपोर्ट आने पर अगर उनकी उम्र 18 वर्ष से कम होगी तब बाल श्रम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.



मालूम हो कि बचपन बचाओ आंदोलन की टीम द्वारा बाल संरक्षण आयोग को दी गई सूचना के आलोक में यह छापेमारी की गई थी. इसमें 24 बच्चों से काम कराए जाने की सूचना मिली थी मगर छापेमारी के



दौरान टीम द्वारा कम उम्र के छह श्रमिकों को रेस्क्यू किया गया था. इन श्रमिकों के वास्तविक उम्र को लेकर पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाया है. लेकिन इस दौरान सभी को कम मजदूरी दिए जाने की बात सामने
जरूर आई है.
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