झारखंड: छऊ नृत्य कला के पुरोधा पद्मश्री मंगला मोहंती का 88 साल की उम्र में निधन
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झारखंड: छऊ नृत्य कला के पुरोधा पद्मश्री मंगला मोहंती का 88 साल की उम्र में निधन
झारखंड में छऊ नृत्य को बढ़ावा देने के लिए मंगला मोहंती ने कई काम किये

झारखंड के छऊ नत्य के पुरोधा पद्मश्री मंगला प्रसाद मोहंती (Mangla Prasad Mohanty) का शुक्रवार शाम निधन (Demise) हो गया. वे 88 वर्ष के थे.

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सरायकेला. झारखंड में छऊ नृत्य कला (Chhau Dance) का एक और स्तंभ ढह गया. 88 वर्षीय पद्मश्री मंगला प्रसाद मोहंती (Mangla Prasad Mohanty) का शुक्रवार शाम निधन (Demise) हो गया. उन्होंने जमशेदपुर के कदमा स्थित आवास पर शाम सात बजे अंतिम सांस ली. मोहंती लंबी बीमारी से ग्रसित थे.

2009 में मिला था पद्मश्री

छऊ नृत्य कला के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले मंगला प्रसाद मोहंती को वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. छऊ नृत्य कला के उत्थान के लिए उन्होंने देश- विदेश में इस नृत्य की गरिमा को बढ़ाने के लिए कार्य किया. उनके निधन से सरायकेला छऊ नृत्य जगत में शोक की लहर है.



जीवन का सफर 
10 जून 1932 में जन्मे मंगला प्रसाद मोहंती का पैतृक निवास सरायकेला शहर के वार्ड नंबर-5 स्थित कंसारी टोला में है. को-ऑपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर से बीए की पढ़ाई साल 1962 में पूरी करने के बाद उन्होंने जमशेदपुर के एक्सएलआरआई से इंडस्ट्रियल रिलेशन एंड सोशल वेलफेयर में 1970 में डिप्लोमा किया. 1988 में प्राचीन कला मंदिर चंडीगढ़ से प्रथम श्रेणी में कत्थक नृत्य में संगीत विशारद की परीक्षा पास की. 1995 में कोलकाता से नृत्य रत्न की उपाधि हासिल की. 2001-02 में कोलकाता से ही प्रथम श्रेणी में तबला विशारद की परीक्षा पास की.

2005 में झारखंड रत्न सम्मान से नवाजे गये थे 

मंगला मोहंती मात्र 10 वर्ष की उम्र में 1942 में कंसारीसाई छऊ अखाड़ा से जुड़े. इसके बाद उन्होंने देशभर में विभिन्न मंचों पर छऊ नृत्य कला का प्रदर्शन किया. 2005 में उन्हें झारखंड रत्न से सम्मानित किया गया था. शकुंतला, सावित्री-सत्यवान जैसे दर्जन भर नए छऊ नृत्य की उन्होंने कोरियोग्राफी भी की.(रिपोर्ट- विकास कुमार)
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