कोरोना वॉरियर की मार्मिक कथा: पति को चरित्र पर शक, सास बेटी से मिलने नहीं दे रही
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कोरोना वॉरियर की मार्मिक कथा: पति को चरित्र पर शक, सास बेटी से मिलने नहीं दे रही
प्रमिला रोबर्ट जीएनएम नर्स के रूप में पिछले कई वर्षों से सरायकेला सदर अस्पताल में पदस्थापित हैं.

नर्स प्रमिला रोबर्ट सरायकेला सदर अस्पताल (Saraikela Sadar Hospital) में कोरोना संक्रमितों के इलाज में लगी हुई हैं. उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड (Isolation Ward) का प्रभारी बनाया गया है.

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सरायकेला. कोरोना संकट (Corona Crisis) में वह लोगों की जिंदगी बचाने का संकल्प लेकर घरबार व सुख-चैन त्यागकर अपना कर्तव्य कर्मठता से निभा रही थी. मगर उसे क्या पता था कि कोरोना की जंग साहस व संकल्प के बल पर लड़ते-लड़ते अपनों की रुसवाई व कलंक झेलना पड़ेगा. इस पूरी मार्मिक पटकथा की बदनसीब नायिका सरायकेला सदर अस्पताल (Saraikela Sadar Hospital) की जीएनएम नर्स प्रमिला रोबर्ट हैं.

प्रमिला रोबर्ट जीएनएम नर्स के रूप में पिछले कई वर्षों से सदर अस्पताल में पदस्थापित हैं. अस्पताल की आकस्मिक सेवा में पिछले कई वर्षों से मरीजों की सेवा में तत्परता व तन्मयता दिखाने के लिए प्रमिला की सेवा भावना का हर कोई कायल है. वह अस्पताल में ड्यूटी के बाद रोज अपने घर जमशेदपुर के बारीडीह बस्ती लौटती थीं. मगर मार्च महीने में हुई कोरोनाबंदी के कारण गाड़ियों की आवाजाही पर रोक के कारण उनका घर से आना- जाना बंद हो गया. वह सदर अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के इलाज में लगी रही. उनकी कार्यकुशलता व कर्मठता देख जिला स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सदर अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड का प्रभारी बना दिया.

बाहरियों से मिली वाहवाही, अपनों से रुसवाई



लेकिन अपनी सेवा से सबकी वाहवाही बटोर रही प्रमिला को अपने घर से रुसवाई मिल रही है. कोरोना संक्रमण के बीच अस्पताल में काम करने के कारण सास ने घर आने पर रोक लगा दिया है. उनका कहना है कि प्रमिला के आने से घर में कोरोना फैल जायेगा. इस नयी परिस्थिति के बीच अब वह घर चाहकर भी नहीं लौट पा रही हैं. उनकी एक बेटी लगातार उन्हें बुला रही हैं, मगर वह बेबस होकर केवल फोन पर बात कर ही खुद को तथा अपनी बेटी को तसल्ली दे रही हैं.



पति ने चरित्र पर सवाल खड़ा किया 

प्रमिला की सेवा भावना व कर्मठता के कारण सिविल सर्जन ने अस्पताल के सबसे उपरी तल्ले में उन्हें रहने के लिए एक कमरा दिया है. अस्पताल से नि:शुल्क उन्हें खाना भी दिया जा रहा है. कहने के लिए वह अपने शिफ्ट की ड्यूटी करती हैं, मगर 24 घंटे मरीजों की सेवा में लगी रहती हैं. उनकी सेवा भाव को हर कोई सलाम करता है. लेकिन रेलवे में काम करने वाले पति मुकेश लारकीन उनके चरित्र पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं. पति का कहना प्रमिता अस्पताल में किसी और के साथ रह रही है, इसलिए घर नहीं आ रही है. घर लौटना है, तो नौकरी छोड़नी होगी. प्रमिला का कहना है कि वह परिवार चलाने के लिए ही नौकरी करती हैं, ऐसे में कैसे छोड़ सकती हैं. अपनी वेदना को कहते-कहते प्रमिला की आंखों आंसूओं के सागर में डूब गईं.

रिपोर्ट- विकास कुमार

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