सरायकेला वन प्रक्षेत्र के हाथी प्रभावित गांवों की संख्या 59 से बढ़कर हुई 189
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सरायकेला वन प्रक्षेत्र के हाथी प्रभावित गांवों की संख्या 59 से बढ़कर हुई 189
सरायकेला में हाथियों का आतंक जारी

चालीस से पचास हाथियों का झूंड जिले में मौजूद है. यह दिनभर जंगल में रहने के बाद शाम को ग्रामीण इलाकों में रुख कर लोगों की फसल चट करने के साथ-साथ घरों को तोड़ रहे हैं.

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सिमटते वन क्षेत्र, खाने-पीने की कमी, विकास कार्य, ग्रामीण क्षेत्रों में हड़िया दारु का इस्तेमाल, न जाने कितने कारण हैं,  जिसके चलते सरायकेला जिले में हाथियों का कहर जारी है. ओडिशा से दलमा जाने के क्रम में हाथी सरायकेला पहुंचते हैं. फिलहाल चालीस से पचास हाथियों का झूंड जिले में मौजूद है. यह दिनभर जंगल में रहने के बाद शाम को ग्रामीण इलाकों में रुख कर लोगों की फसल चट करने के साथ-साथ घरों को तोड़ रहे हैं. ग्रामीण भय के साये में रतजगा कर रहे हैं तो वन विभाग को इन हाथियों से निबटने में मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं.

पिछले तीन महीने से सरायकेला के किसान सर्द रातों में हाथियों के भय से रतजगा कर रहे हैं. वन विभाग भी पटाखा, जूट का बोरा, मोबिल आदि से हाथी को भगाने में नाकाम होकर अब बंगाल के विशेष दल का सहारा ले रहा है. रात भर हाथों में मशाल व टार्च थामे वन विभाग व ग्रामीणों का दल जैसे-तैसे हाथियों को रिहायशी इलाकों में रोकने की कवायद में जुटा रहता है.  ये रोज की कहानी बन गयी है. ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह लोग आग लगाकर जगाते हैं तथा जागते रहो का नारा लगाते हैं.

मानव- हाथी के बीच पिछले कई महीनों से चल रहे द्वंद्व के बीच दर्जनों ग्रामीणों का आशियाना उजड़ चुका है. मेहनत की फसल व अनाज बर्बाद हो चुके हैं. कई बार तो लोग घायल भी हुए हैं तथा कई बार उन्हें जान भी गंवानी पड़ी हैं.  भोजन व पानी की अच्छी व्यवस्था के कारण हाथी यहां से जाने का नाम नहीं ले रहे हैं.  उधर वन विभाग व आम लोग बेहद परेशान हैं. खासतौर पर आने वाले मैट्रिक व इंटर की परीक्षा के मद्देनजर गांव के बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं.



राजनगर, सरायकेला व खरसावां प्रखंड के दर्जनों गांव इन दिनों हाथियों के तांडव से परेशान हैं. हाथियों का झूंड दो तीन दिन तक किसी एक गांव में तांडव मचाने के बाद अगले गांव की ओर रुख कर जाता है.  हाथियों के जिले में लंबे ठहराव के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में हड़िया दारु का प्रसार बड़ा कारण माना जा रहा है. वन विभाग द्वारा लगातार ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे हड़िया दारु का सेवन अभी न करें.  वन प्रमंडल पदाधिकारी ए एक्का कहते हैं कि जहां भी घर तोड़े गये, वहां अधिकतर घरों में हड़िया दारु की मौजूदगी की बात सामने आयी है. हाथी दूर से ही इसके महक को सूंघकर आकर्षित हो जाते हैं.
आंकड़ों पर गौर करें तो पहले जहां सरायकेला वन प्रक्षेत्र के 59 गांव हाथी प्रभावित श्रेणी में थे, अब यह बढ़कर 189 गांव तक पहुंच गया है. हाथियों के कॉरिडोर से भटकाव तथा रिहायशी इलाकों में लगातार दस्तक देना एक बड़ी परेशानी के रुप में सामने आ रही है.
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