आठ महीने बाद आंगनबाड़ी केंद्रों को आवंटित हुआ चावल
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आठ महीने बाद आंगनबाड़ी केंद्रों को आवंटित हुआ चावल
सराईकेला जिले के 35095 लाभुकों के लिए 92.6 मीट्रिक टन का आवंटन किया गया है.

झारखंड में कुपोषण से मुक्ति और तीन से छह साल तक के गरीब बच्चों को पुरक पोषाहार लिए कई आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं. इन आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था बेहतर करने के दावे तो सरकार भरपूर करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं उलट है.

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झारखंड में कुपोषण से मुक्ति और तीन से छह साल तक के गरीब बच्चों को पुरक पोषाहार लिए कई आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं. इन आंगनबाड़ी केंद्रों में बेहतर व्यवस्था के दावे तो सरकार भरपूर करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं उलट है.

सराईकेला जिला समेत पूरे प्रदेश में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 के आठ महीने गुजरने के बाद आंगनबाड़ी केन्द्रों को मुहैया कराये जाने वाले चावल का आवंटन किया गया है. ऐसे में इन बीते आठ महीनों में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को मिलने वाली खिचड़ी का क्या हाल होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

खरसांवा बाल परियोजना अंतर्गत चावल नहीं होने के कारण बच्चों को खिचड़ी नहीं मिल रहा है. उन्हें सिर्फ नाश्ता ही दिया जाता है. कमोबेश यही स्थिति सभी केन्द्रों की है. आंगनबाड़ी केन्द्र संचालिका के द्वारा किसी तरह व्यक्तिगत स्तर तथा पिछले वित्तीय वर्ष के मिले चावल से जैसे-तैसे बच्चों को खिचड़ी मुहैया करायी जा रही है.



दस महीने में आखिरकार सरकार की नींद खुली और सराईकेला समेत सभी जिलों में चावल का आवंटन किया गया है. इस बारे में जानकारी देते हुए जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुरुची प्रसाद ने बताया कि सराईकेला जिले के 35095 लाभुकों के लिए 92.6 मीट्रिक टन का आवंटन किया गया है. जिसे एक दो दिनों में आंगनबाड़ी केन्द्रों तक पहुंचा दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि चावल आने से काफी राहत मिलेगी और बच्चों को मिलने वाली खिचड़ी अब सुचारु हो पाएगी. मालूम हो कि सरकार द्वारा सराइकेला जिले को पिछली बार बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 के फरवरी माह में 53755 लाभुकों के लिए 280 मीट्रिक टन का चावल का आवंटन हुआ था. इसी चावल से अब तक जिले के बच्चों को खिचड़ी खिलाई जा रही है.
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