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जेलब्रेक कांड के 7 साल बाद भी सरायकेला जेल की सुरक्षा अधूरी, 2जी से 4जी नहीं हुआ जैमर
Saraikela-Kharsawan News in Hindi

News18 Jharkhand
Updated: January 21, 2020, 12:10 PM IST
जेलब्रेक कांड के 7 साल बाद भी सरायकेला जेल की सुरक्षा अधूरी, 2जी से 4जी नहीं हुआ जैमर
साल 2011 में सरायकेला जेलब्रेक कांड हुआ था. इस दौरान जेल से कुछ नक्सली और अपराधी फरार हो गये थे

इंस्पेक्टर सत्येन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि सरायकेला जेल की सुरक्षा और सुविधा की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर गृह विभाग को भेजा जाएगा. फिर विभाग के निर्देश पर जेल की सुरक्षा और पुख्ता करने के लिए कदम उठाये जाएंगे.

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सरायकेला. 17 अगस्त 2011 को सरायकेला जेल ब्रेक कांड (Saraikela Jail Break Incident) होने के बाद जेल की सुरक्षा (Security) को लेकर तमाम बातें की गई थीं. लेकिन इस घटना के 7 साल बीत जाने के बाद भी जेल की सुरक्षा अधूरी पड़ी हुई है. 4जी के जमाने में अभी भी सरायकेला जेल का काम 2जी जैमर से चल रहा है. हालांकि जेल प्रशासन ने 4जी करने को लेकर कई बार गृह विभाग (Home Department) को लिखा. लेकिन इस पर बात आगे नहीं बढ़ी है. इसके अलावा हाईमास्ट लाइट और सुरक्षा कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी, जेल की चहारदीवारी की ऊंचाई को बढ़ाना, जैसे काम भी अभी तक पूरे नहीं हुए. हालांकि अब जेल की अधूरी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए गृह विभाग ने पहल शुरू की है.

सरायकेला जेल की सख्त होगी सुरक्षा 

जिले में अपराध व नक्सली घटनाओं में इजाफे को देखते हुए गृह विभाग के निर्देश पर एक टीम ने सोमवार को सरायकेला जेल का निरीक्षण किया. और उपलब्ध सुविधा व सुरक्षा का आकलन किया. इस दौरान टीम ने जेल की सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए उठाये जाने वाले कदम को लेकर खाका तैयार किया. इस बारे में जानकारी देते हुए टीम के नेतृत्वकर्ता इंस्पेक्टर सत्येन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि सरायकेला जेल की सुरक्षा और सुविधा की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर गृह विभाग को भेजा जाएगा. फिर विभाग के निर्देश पर जेल की सुरक्षा और पुख्ता करने के लिए कदम उठाये जाएंगे.

नक्सलियों और अपराधियों ने किया था जेलब्रेक

17 अगस्त 2011 को हथियार के बल पर हार्डकोर नक्सली बलराम साहू उर्फ डेविड, सोमरा हांसदा, रवि सिंह मुंडा, गणेश प्रमाणिक उर्फ पेटू, राखाल कांडियांग, बबलू बागती सरायकेला जेल से फरार हो गये थे. हालांकि जेलब्रेक की इस घटना के कुछ दिन बाद रवि सिंह मुंडा पुलिस के साथ इनकाउंटर में आदित्यपुर में मारा गया था. वहीं बलराम साहू उर्फ डेविड, सोमरा हांसदा, गणेश प्रमाणिक उर्फ पेटू तथा राखाल कांडियांग को बाद में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था.

वर्षों से फरार अपराधी बबलू बागती को भी बीते 9 जनवरी को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से गिरफ्तार कर लिया गया. उसे सरायकेला जेल में बंद रखा गया है. बलराम साहू उर्फ डेविड अभी हजारीबाग जेल में बंद है. गणेश प्रमाणिक उर्फ पेटू और सोमरा हांसदा टाटा के घाघीडीह जेल में बंद हैं. जबकि राखाल कांडियांग बेल पर जेल से बाहर है.

तत्कालीन जेलर पर लगे थे मिलीभगत के आरोपमालूम हो कि सरायकेला मंडलकारा से ये सभी छह अपराधी और नक्सली हथियार के बल पर 17 अगस्त 2011 को फरार हो गये थे. इस घटना के बाद तत्कालीन जेलर रमाशंकर सिंह और कुछ जेल कर्मियों पर मिलीभगत के आरोप लगे थे. घटना के बाद सरायकेला जेल में जिला पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से अलग-अलग चेकिंग की व्यवस्था की गई है. साथ ही मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी भी लगाये गये हैं. हालांकि अभी जेल की सुरक्षा अधूरी ही है. इसी अधूरी सुरक्षा के बीच इस जेल में कई बड़े नक्सली और अपराधी बंद हैं.

रिपोर्ट- विकास कुमार

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First published: January 21, 2020, 12:09 PM IST
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