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सांसद से लेकर सरकारी महकमे ने नहीं सुनी बात, तो खुद ही सड़क बनाने निकल पड़े ग्रामीण

सड़क बनाने में जुटे गांव के महिला और पुरुष

सड़क बनाने में जुटे गांव के महिला और पुरुष

ग्रामीणों (Villagers) ने क्षेत्र के सांसद, विधायक तथा प्रशासन के समक्ष पिछले कई वर्षों से गुहार लगायी. मगर सुनवाई नहीं हुई और सड़क (Road) नहीं बनी.

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सरायकेला. सरकार अपने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को सुविधा प्रदान करने का दावा करती है. मगर इस प्रयास के बीच कई जगहों से ऐसी तस्वीरें भी आती हैं, जो सरकार और प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़ा करती हैं. सरायकेला जिले के ईचागढ़ प्रखण्ड क्षेत्र के काठघोड़ा गांव में सड़क (Road) नहीं है. इसको लेकर पिछले कई सालों से प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीणों (Villagers) ने अब खुद ही श्रमदान कर सड़क निर्माणकार्य शुरू कर दिया है. काठघोड़ा में टोला सोसोडीह से पुरनाडीह डुंगरी रास्ता ठीक नहीं है. लोगों को पगडंडी व उबड़- खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है. जिस कारण बच्चों को स्कूल जाने तथा आम लोगों को सफर करने में काफी दिक्कत होती है.

ग्रामीणों की गुहार पर नहीं हुई सुनवाई 

इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने क्षेत्र के सांसद, विधायक तथा प्रशासन के समक्ष पिछले कई वर्षों से गुहार लगायी. मगर सुनवाई नहीं हुई और सड़क नहीं बनी. लिहाजा ग्रामीणों ने अब बरसात के पूर्व खुद अपने स्तर से सड़क बनाने का संकल्प लेकर प्रयास शुरू कर दिया है. इस बाबत ग्रामीणों ने बैठक कर सहमति बनायी, फिर सभी मिलकर सड़क बनाने में जुट गये हैं. सोसोडीह से पुरनाडीह डूंगरी तक दो किलोमीटर के सड़क निर्माण में काफी संख्या में गांव की महिलाएं और पुरुष लगे हुए हैं. हालांकि कच्ची सड़क ही बनाई जा रही है, ताकि यह चलने लायक हो सके. ग्रामीण पास के खेतों से मिट्टी काटकर सड़क बना रहे हैं.



सड़क नहीं रहने के कारण सफर में होती है दिक्कत
जनप्रतिनिधि या प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीण दुखी हैं. स्थानीय निवासी रंजीत टुडू ने बताया कि सोसोडीह से पुरनाडीह डुंगरी तक लगभग 2 किलोमीटर के सड़क निर्माण को लेकर उनलोगों ने प्रखंड से लेकर अनुमंडल पदाधिकारी तक कई बार आवेदन दिया. साथ ही पिछले साल चुनाव के समय कई जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई. सभी ने काम होने का भरोसा दिलाया, पर किसी ने समस्या दूर करने के लिए पहल नहीं की.

उपप्रमुख पति देवेश्वर महतो ने बताया कि इस सड़क के निर्माण को लेकर एसडीओ के साथ बैठक में आश्वासन भी दिया गया था, मगर कार्य हो नहीं पाया. इसलिए ग्रामीण अपने स्तर से बरसात के पूर्व चलने लायक सड़क बनाने में जुटे हैं, ताकि बच्चों को स्कूल और लोगों को आने-जाने में कोई परेशानी न हो.

रिपोर्ट- विकास कुमार

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