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Sawan 2020: देवघर में पतझड़ जैसा है इस बार का सावन

बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए प्रशासन ने ऑनलाइन व्यवस्था की है.

बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए प्रशासन ने ऑनलाइन व्यवस्था की है.

Sawan 2020: बीते साल सावन महीने के दूसरे सोमवार के आंकड़े बताते हैं कि बाबा नगरी (Deoghar) में आस्था का सैलाब देखने को मिला था, जबकि इस बार महज कुछ पुरोहितों ने बाबा भोले पर जलार्पण कर परंपरा का निर्वहण किया. पिछले साल इस दिन दो लाख से अधिक कांवड़ियों ने जलार्पण किया था.

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झारखंड. झारखंड के देवघर (DEoghar) को बाबा नगरी भी कहते हैं. पूरे सावन (Sawan) इस बाबा नगरी में रौनक छाई रहती है. पांव धरने की जगह भी नहीं मिलती. श्रद्धालुओं का रेला पूरे देवघर में पसरा रहता है. पर इस बरस ऐसा कुछ भी नहीं. हर तरफ सन्नाटा पसरा है. बाबा नगरी में होने वाला कारोबार ठप है. कहते हैं कि देवघर के सालभर का जो टर्नओवर होता है वह सावन के एक महीने के टर्नओवर के बराबर होता है. अनुमान लगाया जा सकता है कि कोरोना से प्रभावित इस सावन में रोजगार और बिजनेस कैसा पतझड़ झेल रहा होगा. वैसे तो पूरे झारखंड और इसके पड़ोसी राज्य बिहार में सावन के दौरान पूजन सामग्री समेत कई कारोबार अपने पूरे उफान पर होते हैं. पर इस बार यह कारोबार ठप पड़ा है. कारोबारियों की जिंदगी अस्त-व्यस्त है. कुम्हारों का कुल्हड़ खरीदने वाला कोई नहीं. सावन में लगभग चौबीसों घंटे चलने वाला चाक इस बार घूमना भूल चुका है.




सारी बेसब्री पर सब्र और निराशा हावी

बाबा नगरी में स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के राज्यों से आकर व्यापार करने वाले लोगों को सावन के इस महीने का इंतजार बेसब्री से रहता था. सोमवार के दिन इस नगर की रौनक देखते बनती थी. लेकिन कोरोना संकट की वजह से इस बार सारी बेसब्री पर सब्र और निराशा हावी है. धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है. सावन में गुलजार रहने वाले देवघर में इन दिनों श्रद्धालु नहीं दिख रहे है.

राज्य सरकार ने भक्तों को घर में रहने की सख्त हिदायत दे रखी है. बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए प्रशासन ने ऑनलाइन व्यवस्था की है. नतीजतन, इस सावन के महीने में बाबामय हो जाने वाले भक्त घर पर ही रह कर बाबा के दर्शन कर रहे हैं.





पिछले साल इस दिन दो लाख से अधिक कांवड़ियों ने जलार्पण किया था

बीते साल सावन महीने के दूसरे सोमवार के आंकड़े बताते हैं कि बाबा नगरी में आस्था का सैलाब देखने को मिला था, जबकि इस बार महज कुछ पुरोहितों ने बाबा भोले पर जलार्पण कर परंपरा का निर्वहण किया. पिछले साल इस दिन दो लाख से अधिक कांवड़ियों ने जलार्पण किया था. सोमवार के जलार्पण के लिए रविवार को ही कांवड़ियों की कतार देर रात कुमैठा स्टेडियम पार कर गई थी.

पिछली बार मंदिर में सुबह 7 बजे तक कुल 2 लाख 49 हजार 9 सौ 57 कांवड़ियों के पहुंचने आंकड़ा दर्ज किया गया था. पर इस बार दूसरी सोमवारी को मंदिर का कपाट सुबह 4:30 बजे खुलने के बाद कांचा जल पूजा हुई और फिर पुजारी ने भोले नाथ की विधिवत पूजा की़. महामारी को देखते हुए सुबह करीब 6:30 बजे बाबा का पट बंद कर दिया गया. उसके बाद शाम को चली आ रही परंपरा के अनुसार भोले नाथ की सरकारी पूजा संपन्न की गई. जिला प्रशासन की ओर से दोनों वक्त की पूजा को आमभक्तों के दर्शन के लिए लाइव किया जा रहा है.


शिवगंगा के चारों ओर बैरिकेडिंग

इस साल शिवगंगा की बैरिकेडिंग कर दी गई है. पिछले साल की तस्वीरों से पता चलता है कि सोमवार के दिन यहां लोगों को पैर रखने की जगह घाट पर नहीं मिलती थी. चारों और घाट पर बच्चे, बड़े, महिला कांवड़ियों का झुंड सीढ़ियों पर मौजूद होता था और पुलिसबल व एनडीआरएफ की टीम नजर रखती थी कि डुबकी लगाने वाले श्रद्धालु सुरक्षित स्नान कर बाबा पर जर्लापण करें.


शिवगंगा के घाट पर होने वाली आरती से वातावरण भक्तिमय हो जाता था. लेकिन इस बार शिवगंगा में कोई स्नान न करे, इसके लिए इसके चारों ओर भारी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. रात दिन दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी सहित बीस लाठी पाटी, पुलिस बल के अलावा पीसीआर वैन व बाबा मंदिर थाना के कर्मियों की चौकस निगरानी है.


सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम



सावन के इस पवित्र महीने के लिए सरकार और जिला प्रशासन की ओर से लाखों ही नहीं करोड़ों रुपए खर्च कर लोगों को इस मेले में आकर भोले नाथ की पूजा-अर्चना करने की अपील की जाती रही  है, वहीं इस बार भक्तों को रोकने के लिए राज्य की सीमा से लेकर बाबा मंदिर के चारों ओर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. बाबा मंदिर में प्रवेश करने वाले सभी पांचों मुख्य दरवाजे पर दंडाधिकारियों के अलावा पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में पुलिसबल की तैनाती की गई है जो कि दिन रात ड्यूटी पर तैनात रहते हैं.


ऐसे में जब खरीदार ही नहीं तो आखिर कोई बिजनेस आखिर चलेगा कैसे? इस बार का हाल यह है कि झारखंड में सावन महीने में होने वाला कारोबार पूरी तरह ठप है. कांवड़ बेचने वाले से चुकिया बेचने वाले तक मायूस हैं. फल-फूलों के कारोबार को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है. झारखंड मं इस बार के सावन में भले बारिश झूम कर हुई हो पर व्यापार के लिहाज से इस बार का सावन पतझड़ का मौसम बन गया.

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