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सर्पदंश से हॉकी खिलाड़ी की मौत, पोस्टमॉर्टम के लिए खाट पर डेढ़ किमी तक ढोई लाश

गांव तक वाहन के पहुंचने का रास्ता नहीं तो पोस्टमॉर्टम के लिए ऐसे ले जाई गई हॉकी खिलाड़ी की लाश.

गांव तक वाहन के पहुंचने का रास्ता नहीं तो पोस्टमॉर्टम के लिए ऐसे ले जाई गई हॉकी खिलाड़ी की लाश.

Simdega News: सिमडेगा में लंबोई पंचायत के नवाटोली गांव में सर्पदंश से लंबोई डे बोर्डिंग हॉकी सेंटर की छात्रा कोमली बेसरा की मौत हो गई. उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाना भी मुश्किल हो गया, क्योंकि गांव से बाहर निकलने के लिए वाहन लायक कोई सड़क ही नहीं है.

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    श्रीराम पुरी. 

    सिमडेगा. सिमडेगा जिले के नवाटोली गांव में गुरुवार रात सर्पदंश से एक हॉकी खिलाड़ी की मौत हो गई. खिलाड़ी की पहचान कोमली बेसरा के रूप में हुई. वह सिमडेगा के लंबोई डे बोर्डिंग हॉकी सेंटर की खिलाड़ी थी. कोरोना महामारी के दौरान हॉकी सेंटर बंद होने के कारण इन दिनों वह गांव में रह रही थी. उसके घर वालों ने बताया कि कल खेत में वह रोपा करके लौटी थी और रात में घर की जमीन पर सोई थी. इसी दौरान करैत सांप ने उसे काट लिया. जैसे ही घर वालों को इसका पता चला वे उसे लेकर गांव के ही प्राथमिक अस्पताल लेकर गए. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

    शुक्रवार सुबह हॉकी सिमडेगा एसोसिएशन के सचिव मनोज कोनबेगी ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी और न्यूज18 के रिपोर्टर के साथ नवाटोली गए. लंबोई तक तो पक्की सड़क है. उसके बाद वहां से नवाटोली जाने के लिए कुछ दूर कच्ची सड़क है. लेकिन नवाटोली गांव के डेढ किलोमीटर पहले सड़क समाप्त हो गई है. कोमली के घर तक जाने का कोई रास्ता नहीं था. किसी तरह खेत की पगडंडियों के सहारे लोग कोमली के घर तक पंहुचे.

    कोमली बेसरा के परिजन और गांववाले अपनी बेटी का पोस्टमॉर्टम कराने को तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि बरसात के दिन में सिमडेगा तक लाश ले जाना मुश्किल है. लेकिन फिर लोगों के समझाने पर वे लोग मान गए. लेकिन अब समस्या हुई कि कोमली के शव को गाड़ी तक कैसे पंहुचाया जाए. तब गांव के लोगों ने खाट निकाली और शव को उसपर रखा. फिर खाट को कंधे पर उठाकर डेढ़ किलोमीटर कीचड़ भरी पगडंडी और तीन बरसाती नाला पार करते हुए कच्ची सड़क तक लाया गया. यहां ऑटो में लाश रख कर 35 किलोमीटर दूर सिमडेगा सदर अस्पताल लाया गया.

    हॉकी सिमडेगा के सचिव मनोज ने कहा जहां से खेल कर खिलाडी ओलंपिक तक जाते हैं, वहां सरकार का ध्यान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कम से कम एक रास्ता तो हो जिसके सहारे एंबुलेंस गांव तक पंहुच सके. मनोज ने कहा कि विकास से दूर ऐसे गांव के लोग इसीलिए पोस्टमॉर्टम से बचना चाहते हैं कि लाश लाने ले जाने की भी समस्या होती है. 400 की अबादी वाला नवाटोली गांव आज इसका जीता जागता उदाहरण है.

    जलडेगा के सीओ खगेश ने भी आज वहां पंहुचे लोगों की परेशानी अपनी आंखों से देखी. वे भी यहां रास्ता होने की जरूरत स्वीकार करते हुए कहते हैं कि यह दुखद है. लंबोई मुखिया शिशिर डांग ने भी कहा कि वे यहां रास्ता के लिए कई बार प्रखंड को बोल चुकी हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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