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Rath Yatra 2022: भंवरपहाड़ गढ़ ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारी पूरी, यहां 180 वर्षों से निभाई जा रही खास परंपरा

Rath Yatra 2022: भंवरपहाड़ गढ़ रथयात्रा में लोगों की काफी भीड़ जुटती है,

Rath Yatra 2022: भंवरपहाड़ गढ़ रथयात्रा में लोगों की काफी भीड़ जुटती है,

Rath Yatra 2022: हर वर्ष कोलेबिरा के भीम राम मिस्त्री एवं उसके पुत्र पप्पू कुमार के द्वारा इस रथ की मरम्मत की जाती रही है. रथ मरम्मती की यह परंपरा इनके द्वारा पिछले कई वर्षों से निभाई जा रही है.

रिपोर्ट- श्रीराम पुरी

सिमडेगा. झारखंड के सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के भंवरपहाड़ गढ़ का ऐतिहासिक रथ मेला काफी प्रसिद्ध है. यहां रथ यात्रा और मेला की तैयारी पूरी हो गई है. कारीगरों ने रथ तैयार कर लिया, अब बस फाइनल टच दिया जा रहा है. भवरपहाड़ गढ़ में मंदिरों के रंग-रोगन का कार्य भी भी लगभग पूरा हो चुका है. भंवरपहाड़ गढ़ रथयात्रा में लोगों की काफी भीड़ जुटती है, ऐसे में स्थानीय लोगों और जिला प्रशासन की टीम ने यहां विशेष रूप से तैयारी की है.

रथयात्रा को लेकर लोगों में भी काफी उत्साह है. बता दें,  हर वर्ष कोलेबिरा के भीम राम मिस्त्री एवं उसके पुत्र पप्पू कुमार के द्वारा इस रथ की मरम्मत की जाती रही है. रथ मरम्मती की यह परंपरा इनके द्वारा पिछले कई वर्षों से निभाई जा रही है. वहीं वैश्विक महामारी कोरोना के 2 साल बाद इस बार रथ मेले में पूरे जिले समेत आसपास के निकटवर्ती राज्यों से भी श्रद्धालुओं की काफी संख्या जुटने की संभावना है.

एक हफ्ते तक चलेगा रथ मेला 
बता दें, भंवरपहाड़गढ़ का यह ऐतिहासिक रथ मेला एक सप्ताह तक चलता है. इस मेले में सर्कस, खेल तमाशे, झूले, खिलौने और मिठाई की दुकानें सजती हैं. यह मेला 1 जुलाई को रथ यात्रा के साथ भंवर पहाड़गढ़ से निकाले जाने के साथ ही प्रारंभ होगी. यहां से कोलेबिरा स्थित मौसी बाड़ी में भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा के विग्रह को लाया जाएगा एवं 9 दिन श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के  लिए रखा जाएगा. नौवें दिन में इन विग्रहों को पुनः मौसी बाड़ी कोलेबिरा से रथ में विराजमान कर श्रद्धालुओं के द्वारा खींचकर भंवरपहाड़गढ़ स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचा दिया जाएगा.

180 सालों से चल रही है परंपरा 
जानकारी के अनुसार भंवरपहाड़गढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा काफी प्राचीन समय से है. जानकारों के अनुसार 180 सालों से रथयात्रा यहां से मौसी बाड़ी कोलेबिरा तक जाती है. भंवर पहाड़ गढ़ परगना के जमींदार ओहदार रणबहादुर सिंह के द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व यह परंपरा प्रारंभ की गई थी. इस रथयात्रा को उनके वंशजों के द्वारा अब तक पूरी निष्ठा व विधि विधान के साथ निकाली जाती है.

Tags: Jagannath Rath Yatra, Jagannath rath yatra news, Jharkhand news

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