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AC कमरों में बैठकर प्लान बनाते रहे मंत्री और अफसर, यहां ग्रामीणों ने खुद ही बना डाली सड़क

Jharkhand News: सरकारी के उदासीन रवैये को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने का फैसला किया. (न्‍यूज 18)

Jharkhand News: सरकारी के उदासीन रवैये को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने का फैसला किया. (न्‍यूज 18)

Simdega News: ग्रामीणों ने बताया कि उन्‍होंने सड़क बनाने को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अफसरों के पास आवेदन किया, लेकिन किसी ने इस पर ध्‍यान नहीं दिया. इसके बाद हमलोगों ने खुद ही सड़क बनाने का फैसला कर लिया. फिर हमने अपनी मेहनत से अपनी सड़क बना डाली.

  • News18Hindi
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    रिपोर्ट – श्रीराम पुरी

    सिमडेगा. झारखंड के सिमडेगा जिले के कोरोमियां बलसेरा गांव के ग्रामीण एक अदद सड़क के लिए अधिकारियों और सरकारी कार्यालयों के चक्‍कर काटते-काटते जब थक गए तो उन्‍होंने अनूठा कदम उठाया. सरकारी उदासीनता से हार कर ग्रामीणों ने खुद ही अपने दम पर सड़क बनाने की ठान ली. फिर क्‍या था, गांव की महिलाएं ओर पुरुष सड़क बनाने में जुट गए. जिसको जैसे बन पड़ा, उन्‍होंने सड़क निर्माण में वैसे अपना सहयोग दिया. किसी ने अपनी ट्रैक्‍टर लगा दिया तो कोई श्रमदान करने में जुट गया और देखते ही देखते सड़क बना डाली.

    दिलचस्‍प है कि प्रदेश की राजधानी में बड़े-बड़े मंत्री और अफसर विकास की योजना बनाते रहे और इधर सभी मौसमों में आवागमन के लिए अनुकूल सड़क की मांग करते-करते थक चुके गांव वालों ने खुद ही सड़क बना डाली.

    किसी ने नहीं सुनी, तो खुद किया फैसला

    कोरोमियां बलसेरा गांव ठेठईटांगर ब्‍लॉक में आता है. सड़क निर्माण में श्रमदान कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को बहुत परेशानी हो रही थी. कई बार बलसेरा गांव में सड़क निर्माण के लिए जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया गया था, लेकिन काफी समय के बाद भी सड़क न बनने पर परेशान गांव के लोगों ने आगे आकर खुद से सड़क निर्माण करने का फैसला किया.

    बरसात के मौसम में तो बहुत ही परेशानी होती थी

    ग्रामीण अशोक बड़ाइक ने बताया कि बरसात के मौसम में 5-6 महीने तक बलसेरा के ग्रामीणों को गांव से निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां तक कि पैदल भी चलना मुश्किल हो जाता है. बरसात के समय किसी प्रकार के वाहन भी इस रास्ते से नहीं जा पाते हैं. गांव के लक्ष्मीकांत सिंह ने बताया कि अनेकों बार बीमार होने पर लोगों को इस रास्ते से अस्पताल ले जाना पड़ता है. गाड़ी न चल पाने के कारण परिजनों को पैदल ही ले जाना पड़ता है. ऐसे में मरीजों के जान जाने की आशंका बनी रहती है. एक अन्‍य ग्रामीण सुखदेव बड़ाइक ने बताया कि अनेकों बार बरसात के समय में दो पहिया वाहन वाले गिर चुकें हैं. गांव के छात्रों को भी स्कूल आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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    समस्या से जल्द निजात दिलाए सरकार

    राष्ट्रीय युवा संसद एवं झारखंड युवा सदन में सिमडेगा जिला का प्रतिनिधित्व करने वाले भरत सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को बलसेरा गांव की इस महत्वपूर्ण समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए, क्योंकि बरसात के समय एम्बुलेंस एवं अन्य वाहन भी इस रास्ते से नहीं जा पाती है. वहीं, बलसेरा के ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर सड़क निर्माण करने की जानकारी मिलने पर विधायक प्रतिनिधि सुशील बोदरा भी मौके पर पहुंचे और कहा कि इस समस्या को अब प्राथमिकता पर कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोंगाडी तक पहुंचाया जाएगा.

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