ताना भगत के आंदोलन से अलग-थलग हो रहा लातेहार का निंद्रा गांव!
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ताना भगत के आंदोलन से अलग-थलग हो रहा लातेहार का निंद्रा गांव!
तानाभगत आंदोलनकारियों की निद्रा गांव में लगी मूर्तियां.

ताना भगत के विरोध प्रदर्शन (Protest) से लातेहार के टोरी समेत पूरे प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हलचल मची है. वहीं इस आंदोलन की प्रयोगशाला के जाने वाले लातेहार के निंद्रा गांव (Nidra Village) में अजीब खामोशी पसरी है.

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  • Last Updated: September 5, 2020, 5:27 PM IST
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रांची. ताना भगत के आंदोलन ने पिछले तीन दिनों में राज्य को झकझोर कर रख दिया. हालात ऐसे हो गए कि लोगों ने इसे एक सामाजिक आंदोलन बताना शुरू कर दिया, लेकिन ताना भगत के आंदोलन की प्रयोगशाला लातेहार के निंद्रा गांव ने एक नई बहस छेड़ दी. ताना भगत का पूरा आंदोलन और राजनीति फिलहाल लातेहार के टोरी से राजधानी रांची शिफ्ट हो गई है. अब मुख्यमंत्री के साथ ही टेबल पर मांगों को लेकर चर्चा होगी और उस पर कोई बड़ा फैसला जल्द हो सकता है.

ताना भगत के विरोध प्रदर्शन से लातेहार के टोरी समेत पूरे प्रदेश में जहां पिछले तीन दिनों से हलचल मची रही, वहीं ताना भगत के आंदोलन के इतिहास को समेटे लातेहार के निंद्रा गांव में खामोशी पसरी रही. गांव के चंद्रमा ताना भगत ने बताया कि उन्हें और पूरे गांव को इस आंदोलन की कोई जानकारी नहीं थी. लिहाजा निंद्रा गांव इस आंदोलन से पूरी तरह अलग-थलग रहा. ऐसे में सवाल ये उठता है कि लातेहार के टोरी से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निंद्रा गांव को इस आंदोलन की जानकारी क्यों नहीं दी गई.

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निंद्रा गांव की रहने वाली इंटर की छात्रा सीमंती ताना भगत बताती हैं अब राज्य सरकार को ताना भगतों का हक देना होगा और अब मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा. बल्कि सरकार को अपना फैसला सरकारी मुहर लगाकर ताना भगतों को सौंपना होगा, जिसमें ताना भगतों की जमीन और उनकी लगान माफी से जुड़े फैसलों को सुनिश्चित करना होगा. सीमंती ने कहा कि सरकार को ताना भगतों की पहचान सुनिश्चित करनी होगी और उनके अधिकारों को प्राथमिकता के साथ पूरा करना होगा.
मूर्ति पूजा पर नहीं रखते भरोसा
पंचमी ने बताया कि आंदोलन की जानकारी नहीं मिलने की वजह से निंद्रा गांव टोरी के आंदोलन से अछूता रहा, लेकिन आंदोलन से जुड़ी तमाम मांगों को पूरा करने कि वे सरकार से अपील करती हैं. लातेहार के निंद्रा गांव में ताना भगत के कुल दस से ज्यादा परिवार रहते हैं. इन तमाम घरों की पहचान मिट्टी के बने घरों के ऊपर लहराते तिरंगों और उनकी जीवनशैली से होती है. दरअसल निंद्रा गांव के प्रवेश द्वार पर ही नौ स्वतंत्रता सेनानी ताना भगत की प्रतिमा लगी है. इन्हीं में एक वंशज का पूरा कुनबा निंद्रा गांव में बसा है.

(रिपोर्ट- संजय सिन्हा)

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