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'झारखंड में दिख रहा है खेल और वोट का अनोखा रिश्ता'

Anil Rai | News18Hindi
Updated: December 4, 2019, 11:51 AM IST
'झारखंड में दिख रहा है खेल और वोट का अनोखा रिश्ता'
झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू है.

झारखंड में चल रहे विधानसभा (Jharkhand Assembly Election) चुनाव के लिए आचार संहिता जरूर लागू है, लेकिन बावजूद इसके खेल के मैदानों पर प्रत्याशियों का 'खेल' चल रहा है, जो युवाओं को अपनी तरफ खींचने में लगे हैं.

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  • Last Updated: December 4, 2019, 11:51 AM IST
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वैसे तो हरियाणा और झारखंड दोनों की चुनावी बिसात अलग है. नेताओं का अंदाज भी अलग लेकिन एक बात तो इन दोनों राज्यों के चुनाव के बीच अहम है, वो है खेल और वोट का गणित. दोनों राज्यों में चुनाव के पहले खिलाड़ियों के लिए नई-नई घोषणाएं की जाती हैं. हरियाणा में जहां चुनावी खेल अखाड़ों में होता है, वहीं झारखंड में ये खेल फुटबॉल और तीरंदाजी के मैदान में हो रहा है. चुनाव की घोषणा से पहले जहां वोट का खेल खुलकर हो रहा था. लेकिन अब चुनाव की घोषणा हो चुकी है. आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है, ऐसे में वोटों के लिए इस खेल के जरिए नया रास्ता तलाशा गया है. यहां तक कि वोट के इस खेल से मांस-भात से लेकर शारब जैसी दावत सब कुछ है और वो भी पुलिस और प्रशासन के सामने.

वोट के एजेंटों ने बनाया खेल का 'खेल'
झारखंड में चुनाव के पहले सिर्फ हड़िया, शराब और मांस भात ही नहीं बंट रहा है, बल्कि इस बार चुनाव में वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए वोट के एजेंट खेल का 'खेल' में करने में जुट गए हैं. चुनाव के करीब 2-3 महीने पहले के स्थानीय अखबारों पर नजर डालें तो रोज कहीं न कहीं, किसी न किसी खेल प्रतियोगिता के उद्घाटन में नेताजी जरूर दिख जाएंगे. इस दौर में खिलाड़ियों के पास नए ड्रेस से लेकर खेल का हर सामान भी नया हो जाता है. दूसरे चरण की बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जुगसलाई, जमशेदपुर पूर्वी, जमशेदपुर पश्चिमी, खूंटी, सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, खरसावां, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, तमाड़, तोरपा, मांडर, सिसई, सिमडेगा, कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र के कई गांव के लोगों से जब हमने बातचीत की, तो ये बात सामने आई कि युवाओं को लुभाने के लिए संभावित प्रत्याशियों ने चुनाव की घोषणा से पहले ही लाखों रुपये खर्च कर फुटबॉल व तीरंदाजी जैसे कई खेलों के आयोजन कराए.

आचार संहिता लागू होने के बाद बदले 'खेल के नियम'

चुनाव के ऐलान से पहले जहां उम्मीदवार खुद मुख्य अतिथि बनकर इन आयोजक की जेब के रास्ते वोट तक पहुंचने का रास्ता तलाश रहे थे वहीं चुनाव बाद उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया है. रांची और हजारीबाग के आस-पास के इलाकों में अगर आप सड़क से गुजरेंगे तो हर खेल के मैदान में इन दिनों कोई न कोई आयोजन चलता दिखेगा. इस तरह के आयोजनों में खाने-पीने से लेकर पुरस्कार तक की कोई कमी नहीं है. अगर हम इन आयोजनों की पड़ताल करेंगे तो साफ पता चल जाएगा कि ये पैसा कहां से और किस रास्ते आ रहा है.

दरअसल, चुनाव आचार संहिता जहां प्रत्याशी को किसी तरह के प्रलोभन देने से रोकती है, वहीं इस तरह के आयोजन के जरिए प्रत्याशी पर्दे के पीछे रहकर आयोजन स्थल पर युवाओं के लिए आदिवासी इलाकों में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल मैच का आयोजन करता है. फिर पुरस्कार के बहाने युवा वर्ग को अपने साथ करने की कोशिश करता है. वहीं कार्यक्रम स्थल पर नॉन वेज, शराब, हांडी जैसी चीजें भी भीड़ के लिए उपल्बध कराई जाती हैं. इस सब सुविधाओं का लाभ कहां से मिल रहा है इसका साफ-साफ संदेश सुविधा का लाभ उठाने वाले को दे दिया जाता है. ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसकी भनक नहीं है, लेकिन इस तरह के आयोजन को प्रशासन रोके भी तो कैसे? और कितने आयोजन रोके क्योंकि आयोजन करने वाले के पास चंदा की रशीद और चंदा देने वाले का पूरा ब्योरा भी तैयार रखा है.

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First published: December 4, 2019, 11:51 AM IST
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