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दो नक्सलियों ने हथियारों के साथ किया सरेंडर

दो नक्सलियों ने हथियारों के साथ किया सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वाले सब जोनल कमांडर ने बताया कि जमींदारी प्रथा के कारण माओवादी में शामिल हुए थे, लेकिन अब माओवादी संगठन में काफी शोषण होने लगा है.

आत्मसमर्पण करने वाले सब जोनल कमांडर ने बताया कि जमींदारी प्रथा के कारण माओवादी में शामिल हुए थे, लेकिन अब माओवादी संगठन में काफी शोषण होने लगा है.

आत्मसमर्पण करने वाले सब जोनल कमांडर ने बताया कि जमींदारी प्रथा के कारण माओवादी में शामिल हुए थे, लेकिन अब माओवादी संगठन में काफी शोषण होने लगा है.

झारखंड के साथ-साथ बिहार में भी सक्रिया भाकपा माओवादी के सब जोनल कमांडर मुटूर यादव उर्फ मुन्नु यादव एवं एरिया कमांडर संजय पासवान ने हथियार के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है.

चतरा जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में एसटीएफ के आईजी प्रवीण कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया है. इस मौके पर एसटीएफ के आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि पुलिस का लक्ष्य है कि वर्ष 2016 तक झारखंड प्रदेश को नक्सलियों का सफाया हो जाएगा. उन्होंने बताया कि झारखंड के सभी नक्सली संगठनों के विरुद्ध पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है.

बता दें कि चतरा जिले के दो दुर्दांत माओवादियों ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर पुलिस अधिकारियों के समक्ष समर्पण कर दिया है. इनमें भाकपा माओवादी के सब जोनल कमांडर मुन्नु यादव उर्फ मुटुर यादव और एरिया कमांडर संजय पासवान हैं.

इस मौके पर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों 50,000 रुपये नगद दिए गए. चतरा जिला के प्रतापपुर थाना के जोलह बिगहा गांव के मुटुर यादव ने वर्ष 1989 में भाकपा माओवादी का दामन था. उसने बताया कि जमींदार से तंग आकर माओवादी में शामिल हुआ था. उसने बताया कि झारखंड के अलावा बिहार के नवादा एवं औरंगाबाद जिला में भी कई घटनाओं का अंजाम दिया था. जबकि चतरा जिला में ही विभिन्‍न थानों में 15 से अधिक मामले दर्ज हैं.

इसके अलावा प्रतापपुर थाना के लिपदा गांव के संजय पासवान ने भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. संजय पासवान ने वर्ष 2008 में भाकपा माओवादी में शामिल हुआ था. हंटरगंज और प्रतापपुर थाने में संजय के विरुद्ध आधे दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. आत्मसमर्पण करने वाले दोनों माओवादियों से पुलिस लाइन में वृक्ष लगवाए गए.

आत्मसमर्पण करने वाले सब जोनल कमांडर ने बताया कि जमींदारी प्रथा के कारण माओवादी में शामिल हुए थे, लेकिन अब माओवादी संगठन में काफी शोषण होने लगा है. एसटीएफ के आईजी प्रवीण कुमार ने कहा कि पूरे प्रदेश में माओवादी अब अंतिम सांसे गिन रहा है और पूरे प्रदेश से नक्सलियों का इसी वर्ष सफाया कर दिया जाएगा.

चतरा पुलिस भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. वर्ष 2015 में भी पुलिस ने सराहनीय काम किए थे.

Tags: Jharkhand news

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