अब घाटशिला की बेटियों को न्याय दिलाने के लिए उठी आवाज, ग्रामीणों ने रैली निकालकर की CBI जांच की मांग

घायशिला में दो बेटियों की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है.
घायशिला में दो बेटियों की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है.

हाथरस (Hathras) मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपे जाने के बाद झारखंड (Jharkhand) में घाटशिला के एक गांव में दो बेटियों की मौत (Death) के मामले में परिवार को न्याय दिलाने के लिए ग्रामीणों ने रैली निकाली और सीबीआई जांच की मांग की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 11:11 AM IST
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घाटशिला. हाथरस (Hathras) में बेटी के साथ दरिंदगी को लेकर जांच अब सीबीआई (CBI) के पास पहुंच चुकी है. इससे लोगों को उम्मीद है कि हाथरस की बेटियों के परिवार वालों को जल्द न्याय (Justice) मिलेगा. वहीं अब सूबे के घाटशिला के बहरागोडा प्रखंड के घाघरा गांव में भी दो किशोरियों की मौत पर न्याय की मांग तेज होने लगी है. ग्रामीणों ने दो बेटियों को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

ग्रामीणों ने हाथ में तख्तियां लेकर बेटियों को न्याय देने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. ग्रामीणों ने इसके लिए गांव में एक रैली भी निकाली. ग्रामीणों के हाथों में जो तख्तियां थी उनमें लिखा था. दोनों बेटियों को न्याय दो, गरीब बेटियों का शोषण बंद करो, पुलिस प्रशासन हाय-हाय. सीआईटी, सीबीआई जांच हो. न्याय की मांग पर घाघरा गांव की महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. महिलाओं ने कहा कि वो तब तक वे चुप नही बैठेंगी जब तक जांच सही तरीके से नहीं होती है. उन्होंने आत्महत्या की बात पर कहा कि दो बेटियां एक साथ एक ही दुपट्टे से आत्महत्या नहीं कर सकती हैं. इस संदिग्ध मौत से पुलिस को पर्दा हटाना होगा. घटना को लेकर ग्रामीणों को संदेह है कि 12 साल की बच्ची गुलापी मुंडा आत्महत्या नहीं कर सकती है. 16 साल की गीता सिंह के साथ ही गुलापी का शव एक ही फंदे से झूलता हुआ मिला था. जबकि गुलापी दूसरे गांव की रहने वाली है. वह अपने रिश्तेदार बुआ के घर घाघरा आई थी.

क्या था मामला
बता दें कि बीते दिनों घाघरा गांव की जंगल में गीता सिंह और पडोसी गांव रूलिया गांव की गुलापी मुंडा का शव एक दुपट्टे के फंदे से झूलता मिला था. घाघरा गांव की गीता सिंह एवं रूलिया गांव की गुलापी मुंडा का शव काजू जंगल में एक ही दुपट्टा के सहारे एक पेड़ से झूलता मिला था. पुलिस प्रथम दृष्टया इस मामले को आत्महत्या मानकर जांच कर रही है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है- किसी भी परिस्थिति में एक साथ दो किशोरी आत्महत्या नहीं कर सकतीं. दोनों की हत्या के बाद शव को लटकाया गया है. पुलिस इस मामले में तेजी से जांच नहीं कर रही है. इस वजह से हत्या में शामिल लोगों को इसका लाभ मिल सकता है. पुलिस की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि खेलकूद के कारण गीता को उसके पिता ने फटकार लगाई थी. इससे नाराज होकर उसने फांसी लगा ली. वहीं  ग्रामीणों का सवाल यह है कि अगर गीता ने नाराज होकर आत्महत्या की तो फिर उसकी भतीजी गुलापी क्यों फांसी लगाएगी. वह तो दो दिनों के लिए अपनी बुआ के घर घाघरा आई थी. ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना की तरह इस मामले की भी जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.
पीड़ित परिवार के घर में नहीं है खाने के लिए अनाज


पीडित परिवार के लोगों ने कहा कि इनके घर पर खाने के लिये चावल तक नहीं है. बेटी की मौत के बाद उसका गांव में ही अंतिम संस्कार किया गया है. पीडित परिवार की तीन बेटियां और एक बेटा है. जिसमें दो बेटी की शादी हो चुकी है. एक बेटी गीता सिंह का शव फंदे से झूलता मिला है. गीता सिंह फुलबॉल की खिलाड़ी थी. वह प्रतिदिन गांव के मैदान में ही अपने अन्य छात्रों के साथ फुलबॉल का अभ्यास करती थी. उसने आत्महत्या क्यों किया है. यह बात गीता के स्कूली छात्रों के मन भी सवाल बना हुआ है. गरीबी के बीच गीता सिंह फुलबॉल में आगे बढ़ना चाहती थी. गीता सिंह का घर भी ऐसा है कि एक ही घर के अंदर गुहाल घर और पूरा परिवार रहते हैं.
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