झारखंड: सामूहिक अवकाश पर जाएंगे 2500 सहायक पुलिसकर्मी, रघुवर सरकार के वादे को पूरा नहीं कर रही हेमंत सरकार
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झारखंड: सामूहिक अवकाश पर जाएंगे 2500 सहायक पुलिसकर्मी, रघुवर सरकार के वादे को पूरा नहीं कर रही हेमंत सरकार
जेएमएम विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाना का भरोसा सहायक पुलिसकर्मियों को दिया है.

रघुवर सरकार (Raghuvar Government) में बहाल किये गये 2500 सहायक पुलिसकर्मी 7 सितम्बर से सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे. इनका आरोप है कि हेमंत सरकार (Hemant Government) उनसे किये गये वादे को पूरा नहीं कर रही है.

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चाईबासा. जेएमएम विधायक दीपक विरूआ (Deepak Viruya)  विधानसभा के मानसून सत्र (Monsoon Session) में सहायक पुलिसकर्मी और होमगार्ड (Home guard) के मुद्दे उठाएंगे. झामुमो विधायक ने कहा कि ये काफी गंभीर मुद्दा है. राज्य सरकार (Hemant Government) को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. हालांकि सरकार के संज्ञान मे मुद्दा है. बावजूद इसके वे विधानसभा में मुद्दा उठाकर सहायक पुलिसकर्मी और होमगार्ड को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे.

रघुवर सरकार में हुई थी बहाली 

सहायक पुलिसकर्मी और होमगार्ड की नियुक्ति रघुवर सरकार के दौरान हुई थी. नियुक्ति के समय सहायक पुलिसकर्मियों को यह आश्वासन दिया गया था कि तीन साल पूरा होने पर उन्हें पुलिस जवानों की तरह स्थायी कर और वेतन दिया जाएगा. लेकिन तीन साल पूरा होने पर उन्हें सुविधा देने में वर्तमान सरकार आनाकानी कर रही है. जिससे सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन की राह पर हैं.



सामूहिक अवकाश पर जाएंगे सहायक पुलिसकर्मी 
सहायक पुलिसकर्मी जिले के विधायकों, सांसद, मंत्री और अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मदद की अपील कर रहे हैं. फिलहाल 4 से 6 सितंबर तक सहायक पुलिसकर्मी काला बिल्ला लगा कर ड्यूटी कर रहे हैं. 7 से 14 सितम्बर तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे. फिर 16 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. राज्य के 12 जिलों के 2500 सहायक पुलिसकर्मी और पश्चिमी सिंहभूम जिले के 300 पुलिसकर्मी फिलहाल हड़ताल पर हैं.

होमगार्ड जवानों को भी नहीं दी जा रही ड्यूटी

कमोवेश होमगार्ड जवानों की भी यही स्थिति है. इन्हें भी रघुवर सरकार सरकार में ही बहाला किया गया था. लेकिन वर्तमान सरकार में इन्हें ड्यूटी नहीं दी जा रही. इसलिए वेतन भी नहीं मिल रहा है. जिससे इनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. होमगार्ड भी सहायक पुलिसकर्मी की तरह ही विधायक, सांसद, मंत्री और अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं. होमगार्ड जवानों की स्थिति ऐसी है कि रोजगार मिलने के बावजूद वे बेरोजगार हैं. ऐसे में न तो वे होमगार्ड की नौकरी छोड़ पा रहे है और ना ही दूसरी नौकरी करने की स्थिति में हैं.

'वादा पूरा करने में सरकार को परेशानी क्यों' 

सहायक पुलिस कर्मियों का कहना है कि अधिकांश पुलिसकर्मी जिले के सुदूरवर्ती और नक्सल क्षेत्रों से आते हैं. यदि सरकार उन्हें हटा देती हैं तो उनके लिए गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा. बहाली के समय रघुवर सरकार ने जो वादा किया था कि उसे पूरा करने में हेमंत सरकार को क्या परेशानी हो रही है.
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