चाईबासा में जिला स्तरीय पोषण अभियान की शुरूआत

राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम के तहत सोमवार को चाईबासा में भी जिला स्तरीय पोषण अभियान की शुरूआत उपायुक्त अरवा राजकमल और उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन ने की.उपायुक्त और उपविकास आयुक्त ने कार्यक्रम के बाद गांव-गांव में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया.

Upendra Gupta | News18 Jharkhand
Updated: September 10, 2018, 11:24 PM IST
चाईबासा में जिला स्तरीय पोषण अभियान की शुरूआत
उपायुक्त अरवा राजकमल पोषण अभियान मेें एक शिशु का मुंह झूठा की रस्म अदा करते हुए
Upendra Gupta | News18 Jharkhand
Updated: September 10, 2018, 11:24 PM IST
राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम के तहत सोमवार को चाईबासा में भी जिला स्तरीय पोषण अभियान की शुरूआत उपायुक्त अरवा राजकमल और उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन ने की.उपायुक्त और उपविकास आयुक्त ने कार्यक्रम के बाद गांव-गांव में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया.इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में पश्चिमी सिंहभूम जिला को कुपोषण मुक्त जिला बनाने का संकल्प लिया गया.इसके लिए अगले तीन माह में एक लाख बच्चों का स्वास्थ्य जांच कराने की घोषणा की गई.राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम के तहत जिले के 500 आंगनबाड़ी केंद्रों का अपना भवन जल्द बनाने की घोषणा की गई. साथ ही सभी गर्भवती महिला और माताओं को विशेष ध्यान रखने के लिए अभियान चलाने का संकल्प लिया गया.

कार्यक्रम में उपायुक्त अरवा राजकमल और उपविकास आयुक्त आदित्य रंजन ने  6 माह के बच्चों का मुंहजुठी कराया तो वहीं गर्भवती महिलाओं को गोद भराई की रस्म पूरी की गई.उपायुक्त ने जिले की चरमराई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्र के सेविका, सहायिका, स्वास्थ्य कर्मी और जिले वासियों से तीन माह का समय मांगा.उपायुक्त ने कहा कि अगले तीन माह में जिले के जीरो साल से 14 साल तक करीब एक लाख बच्चों का स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि बीमारी की पहचान कर आयुष्मान भारत योजना के तहत बीमारी और कुपोषण को दूर किया जाएगा.उपायुक्त ने कहा कि जिले के बच्चों कुपोषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जिले के 500 आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना भवन बनाने के लिए जल्द फंड देने की आश्वासन दिया है.वहीं उपविकास आयुक्त ने कहा कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए आंगनबाड़ी  केंद्रों की भूमिका सबसे अधिक है.इसके लिए जिले सभी सीडीपीओ, पर्यवेक्षिका और आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को सक्रिय होना होगा.
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