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पैसों के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज, इसलिए मासूमों को रस्सी से बांधकर रखते हैं घरवाले
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News18 Jharkhand
Updated: February 18, 2020, 12:34 PM IST
पैसों के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज, इसलिए मासूमों को रस्सी से बांधकर रखते हैं घरवाले
पैसे के अभाव में घरवाले बच्चों का इलाज नहीं करा पा रहा है. इसलिए रस्सी से बांधकर रखते हैं.

मां दुलारी का कहना है कि उसके पास उतने पैसे नहीं कि बेटे का इलाज करा सके. जन्म के समय वह ठीक था, लेकिन जैसे ही चलना शुरू किया, परेशानी शुरू हो गई. बच्चा बोल भी नहीं पाता है. विक्षिप्त जैसी हरकत करता है.

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पूर्वी सिंहभूम. जिले के घाटशिला (Ghatshila) अनुमंडल के धालभूमगढ़ में दो मासूम बच्चों (Children) को रस्सी से बांधकर (Tied With Rope) रखने पर परिवारवाले (Family) मजबूर हैं. तीन साल का एक बच्चा मौदाशोली पंचायत के भादुआ गांव का है. जबकि दस साल का दूसरा बच्चा इसी पंचायत के डोंगाडीह गांव का है. दोनों दिमागी तौर पर कमजोर हैं. लेकिन घरवाले उतने सक्षम नहीं कि उनका इलाज करा पाए. लिहाजा दोनों को रस्सी से बांधकर रखते हैं. इलाज के नाम पर दोनों को जड़ी-बूटी दी जाती है.

इलाज के लिए नहीं है पैसे

छोटे बच्चे की मां दुलारी सोरेन बताती है कि अगर बच्चे को रस्सी से बांधकर नहीं रखते हैं, तो वह उत्पात मचा देता है. इधर-उधर भागने लगता है. एक बार वह भागते-भागते बड़े गड्ढे में गिर गया था. दुलारी का कहना है कि उसके पास उतने पैसे नहीं कि बेटे का इलाज करा सके. जन्म के समय वह ठीक था, लेकिन जैसे ही चलना शुरू किया, परेशानी शुरू हो गई. बच्चा बोल भी नहीं पाता है. विक्षिप्त जैसी हरकत करता है.



बच्चों को खाट और पेड़ से बांधकर रखते हैं 



पिता राज मिस्त्री का काम करता है. वह दिनभर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहता है. इसलिए मां दुलारी को घर का कामकाज करने के लिए मासूम को रस्सी से खाट में बांधकर रखना पड़ता है. उधर, डोंगाडीह गांव के रहने वाले हरिराम हांसदा के दस वर्षीय बेटे की भी दिमागी हालत ठीक नहीं है. घरवालों उसे भी रस्सी से बांधकर रखते हैं. 10 साल का होने के कारण उसे खाट से नहीं, बल्कि पेड़ से बांधकर रखा जाता है.

सरकार से लगाई इलाज की गुहार 

पिता हरिराम हांसदा कहते हैं कि रुपयों के अभाव में बेटे का इलाज जड़ी-बूटी से करा रहे हैं. लेकिन ठीक नहीं हो पा रहा है. धीरे-धीरे बेटा बड़ा हो रहा है. अब वह इधर-उधर भागने लगता है. इसलिए उसे रस्सी से बांधकर रखते हैं.

दोनों परिवारों ने सरकार से दोनों बच्चों का इलाज करवाने की गुहार लगाई है. इस तरह की परेशानी के इलाज के लिए रांची में रिनपास संस्था मौजूद है.

रिपोर्ट- प्रभंजन कुमार 

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First published: February 18, 2020, 12:34 PM IST
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