झारखंड: मजदूरों के पलायन की आड़ में मानव तस्करी का खेल, सरकार-प्रशासन बेबस
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झारखंड: मजदूरों के पलायन की आड़ में मानव तस्करी का खेल, सरकार-प्रशासन बेबस
कोल्हान प्रमंडल में एक पखवाड़े में 3 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया.

लॉकडाउन (Lockdown) खत्म होने के साथ ही झारखंड से बड़े पैमाने पर मजदूरों (Laborers) का शहर की ओर रूख करना शुरू हो गया है. लेकिन इस पलायन की आड़ में मानव तस्करी (Human trafficking) का धंधा भी फलने लगा है.

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चाईबासा. झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में राज्य सरकार और जिला प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद मानव तस्करी (Human Trafficking) जारी है. ऐसा कोई दिन नहीं जब 200 से 300 लोग रोजगार के लिए दक्षिण-पश्चिम के राज्यों में पलायन नहीं कर रहे हों. कई बार पुलिस (Police) और आदिवासी संगठनों ने इन्हें पकड़ा भी, फिर भी पलायन जारी है.

गत शुक्रवार को तमिलनाडु जा रहे 50 युवक-युवतियों को, जिनमें कुछ नाबालिग बच्चियां भी शामिल थीं, पुलिस ने गुप्त सूचना पर रोका और एक तस्कर जवाहर दास को गिरफ्तार किया. ये सभी लोग चाईबासा के गांधी मैदान में बस के इंतजार में खड़े थे. तभी पुलिस को सूचना मिली और पुलिस ने मौके पर पहुंच कर तस्कर को पकड़कर सदर थाना लाया. बाद में सभी युवक-युवतियों को उनके घर भेजा गया. इससे पहले 1 सितंबर को ही मंझारी थाना क्षेत्र से दो सगे भाई-बहन को पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. उस समय भी करीब 100 युवक-युवती, जिनमें कई नाबालिग भी थे, तमिलनाडु जा रहे थे.

कंपनियों के एजेंट गांव-गांव में मौजूद



दक्षिण भारत के राज्यों की टेक्सटाइल और फूड से जुड़ी कम्पनियां फर्जी कागजात पर कोल्हान के युवक-युवतियों को बस भेज कर मंगवा रही हैं. इसके लिए बाकायदा कंपनियां कोल्हान में एजेंट नियुक्त किया है, जो गांवों में घूम-घूम कर बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दिलाने के नाम पर तैयार करते हैं, फिर कम्पनी से बात कर उन्हें भेजते हैं, इसके लिए कम्पनियां एजेंटों को मोटी कमीशन देती है.
मजदूरों के साथ बड़ी संख्या में नाबालिग भी जा रहे शहर  

लॉकडाउन के दौरान सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 32 हजार प्रवासी मजदूर बाहर से पश्चिमी सिंहभूम लौटे. मगर ये आंकड़ा एक लाख से भी कहीं अधिक है. जो निजी वाहनों से लौटे थे और उनका आंकड़ा दर्ज नहीं है. लॉकडाउन के खत्म होने के बाद अब ये प्रवासी मजदूर शहरों की ओर जा रहे हैं. इनके साथ वैसे युवा भी जा रहे हैं, जो पहली बार रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर रूख कर रहे हैं. इनमें नाबालिगों की संख्या भी काफी अधिक है.

मजदूरों को रास नहीं आया मनरेगा में रोजगार 

इसके लिए राज्य सरकार की नीतियां काफी हद तक जिम्मेवार हैं. घर लौटने वाले प्रवासियों को मनरेगा में रोजगार दिया जाने लगा, जो प्रवासियों को रास नहीं आया. फिर जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ कम्पनियों ने पहले से अधिक वेतन देने का लालच देकर प्रवासियों को वापस बुला लिया. यहीं कारण है कि प्रवासी फिर से पलायन कर रहे हैं. और सरकार मौन रहने के सिवाय कुछ कर नहीं पा रही है.
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