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पीएम ने चाईबासा मेडिकल कॉलेज का किया शिलान्यास, पूरा हुआ आदिवासियों का सपना

चाईबासा का मेडिकल कॉलेज 275 करोड़ की लागत से अगले तीन साल में बन कर तैयार हो जाएगा

आदिवासी समाज के लोगों का सपना था कि उनका बेटा भी डाक्टर बने. आज वह सपना पूरा हो गया. अब आदिवासियों के बच्चे अपने घर का खाना खाकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकेंगे और डॉक्टर बन कर अपने माता-पिता का सपना पूरा करेंगे.

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एक दशक से भी अधिक कोल्हान के आदिवासी समाज का सपना आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा कर दिया. आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के लांचिंग के साथ पीएम ने चाईबासा मेडिकल कॉलेज का रांची से ऑनलाइन शिलान्यास किया. प्रधानमंत्री के शिलान्यास का बटन दबाते ही चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में जुटे 5000 से अधिक लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाई और प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया. मैदान में बड़े-बड़े कई एलईडी स्क्रीन लगाए गए थे जिसपर रांची में आयोजित आयुष्मान भारत कार्यक्रम का सीधा प्रसारण चल रहा था. चाईबासा में मेडिकल कॉलेज खुलने से कोल्हान और आस-पास के करीब 65 लाख आबादी को स्वास्थ्य के क्षेत्र में और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा.

चाईबासा का मेडिकल कॉलेज 275 करोड़ की लागत से अगले तीन साल में बन कर तैयार हो जाएगा. चाईबासा शहर से 5 किमी दूर उलीझारी गांव में 25 एकड़ जमीन पर जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा. सबसे पहले 300 बेड का अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस अस्पताल बनेगा. फिर मेडिकल कॉलेज बनेगा जहां 150 छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीट उपलब्ध होगा.

प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत के लांचिंग और मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास के मद्देनजर चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में प्रमंडलीय सहिया सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था. इसका उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने किया. इस कार्यक्रम में कोल्हान आयुक्त विजय कुमार सिंह, राज्य टीएसी सदस्य जेबी तुबिद, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाडंगी, डीसी अरवा राजकमल, एसपी क्रांति कुमार सहित पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिला के स्वास्थ्य विभाग अधिकारी,कर्मी और सहिया, सेविका मौजूद थीं.

भाजपा सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि चाईबासा मेडिकल कॉलेज खुलने से आदिवासी समाज के लोगों के चेहरों पर खुशी छा गई है. आदिवासी समाज के लोगों का सपना था कि उनका बेटा भी डाक्टर बने. आज वह सपना पूरा हो गया. अब आदिवासियों के बच्चे अपने घर का खाना खाकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकेंगे और डॉक्टर बन कर अपने माता-पिता का सपना पूरा करेंगे.

ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य जेबी तुबिद ने कहा कि सिंहभूम जनजातीय क्षेत्र होने के कारण आजादी के बाद से ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपेक्षित रहा है. स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हो पाने के कारण यहां लोग गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं करा पाते हैं और बीमारी को जीवन भर ढोते हुए असमय मर जाते हैं. ऐेसे समय में सीएम रघुवर दास की दृढ़ इच्छा शक्ति ने चाईबासा मेडिकल कॉलेज की मांग केंद्र तक पहुंचायी और केंद्र में पीएम मोदी ने सीएम की मांग को स्वीकार कर जनजातीय समाज को बचाने का सफल प्रयास किया है.

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