सारंडा एक्शन प्लान बना चुनावी मुद्दा, बीजेपी-कांग्रेस एक-दूसरे को घेरने में जुटी

सारंडा में आदिवासियों के विकास के लिए कांग्रेस ने 2011 में सारंडा एक्शन प्लान की शुरूआत की थी. लेकिन 8 साल बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पायी. बता दें कि सारंडा एक्शन प्लान लागू होने के चलते सात पंचायतों में मोदी सरकार की योजनाएं लागू नहीं हो सकी.

Upendra Gupta | News18 Jharkhand
Updated: April 18, 2019, 8:52 AM IST
सारंडा एक्शन प्लान बना चुनावी मुद्दा, बीजेपी-कांग्रेस एक-दूसरे को घेरने में जुटी
सारंडा एक्शन प्लान को लेकर भाजपा-कांग्रेस एक-दूसरे पर फोड़ रहे हैं ठिकरा
Upendra Gupta | News18 Jharkhand
Updated: April 18, 2019, 8:52 AM IST
झारखंड के सिंहभूम संसदीय क्षेत्र में सारंडा एक्शन प्लान इस बार मुख्य चुनावी मुद्दा बना हुआ
है. कांग्रेस को घेरने के लिए सारंडा एक्शन प्लान की विफलता के लिए भाजपा जोर-शोर से आदिवासियों
के बीच रख रही है. वहीं कांग्रेस सारंडा एक्शन प्लान की विफलता का सारा ठिकरा भाजपा के सिर
फोड़ने में जुडी है.

सारंडा में आदिवासियों के विकास के लिए कांग्रेस ने 2011 में सारंडा एक्शन प्लान की शुरूआत की थी. कांग्रेस के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने करोडों रूपए की लागत से कई योजनाओं का शुभारंभ किया था. लेकिन 8 साल बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पायी. बता दें कि सारंडा एक्शन
प्लान लागू होने के चलते सात पंचायतों में मोदी सरकार की योजनाएं लागू नहीं हो सकी. नतीजन सात पंचायत के लोगों के साथ "न माया मिली, न राम" वाली कहावत चरितार्थ हुई.

भाजपा के तमाम नेता सारंडा एक्शन प्लान को लोकसभा चुनाव में भुनाने के लिए सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के नक्सल प्रभावित सुदूरवर्ती गांवों में बड़े जोर-शोर से उठा रहे हैं. भाजपा के नेता एक्शन प्लान में जयराम रमेश और कांग्रेस पर घोटाले का भी सीधा आरोप लगा रहे हैं. भाजपा के पूर्व विधायक गुरूचरण नायक और भाजपा नेता अशोक षाडंगी सारंडा एक्शन प्लान की विफलता का ठिकड़ा फोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस ने किस मकसद से सारंडा एक्सन प्लान शुरू किया यह आज भी आदिवासी नहीं समझ पाएं.ये भी पढ़ें- झारखंड के 'अर्जुन' के निशाने पर कौन? विपक्ष या फिर...

वहीं पूर्व सीएम मघु कोड़ा की पत्नी और कांग्रेस प्रत्याशी गीता कोड़ा ने सारंडा एक्शन प्लान की विफलता के लिए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद सारंडा एक्सन प्लान को बंद कर दिया गया. जिससे एक्शन प्लान की योजनाएं घरातल पर नहीं उतर सकी.

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