लाइव टीवी

...तो इसलिए यहां के आदिवासी अपने घरों में लगाते हैं उल्टी चलने वाली घड़ी

News18 Jharkhand
Updated: January 13, 2020, 7:13 PM IST
...तो इसलिए यहां के आदिवासी अपने घरों में लगाते हैं उल्टी चलने वाली घड़ी
कोल्हान में आदिवासी अपने घरों में उल्टा चलने वाली घड़ियां सजाते हैं.

उल्टी घड़ी को लेकर हो आदिवासी के धर्मगुरु दासराम वर्घा बताते हैं कि प्रकृति हमेशा दाहिने से बायें की ओर चलती है. इसी विचारधार पर आदिवासी समाज अपना सारा काम करता है. इसलिए दाहिने से बायें चलने वाली घड़ी घरों में सजाते हैं.

  • Share this:
चाईबासा. कोल्हान का आदिवासी समाज (Tribal Society) आज भी प्रकृति के नियमों की कद्र करता है. आदिवासियों का यह प्रयास होता है कि वे प्रकृति के विपरीत कोई काम न करें. इसलिए यहां के आदिवासी अपने घरों में विपरीत दिशा में चलने वाली घड़ी (Reverse Watch) लगाते हैं. यह घड़ी आम घड़ी के विपरीत दाहिने से बायें की ओर घुमती है. लेकिन समय आम घड़ी की तरह बिल्कुल सही बताती है. दरअसल आदिवासियों का मानना है कि जब वे सारे कार्य प्रकृति के नियमों के अनुरूप करते हैं, तो उनकी घड़ी भी प्रकृति के अनुरूप ही होनी चाहिए.

उल्टी घड़ी का ये है इतिहास

दरअसल आदिवासियों के उल्टी घड़ी का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. हो आदिवासी समाज के धर्मगुरु डॉ. दासराम वर्घा को साल 1999 में इस उल्टी घड़ी के बारे में विचार आया. और साल 2000 में एक आदिवासी इंजीनियर ने धर्मगुरु के निर्देश पर उल्टी घड़ी को छतीसगढ़ में तैयार करवाया. जिसके बाद आदिवासियों में इस घड़ी को लेकर प्रचार-प्रसार किया गया. अब कोल्हान के आदिवासी इसी उल्टी घड़ी को अपने घरों में सजाते हैं.

आदिवासी धर्मगुरु दासराम वर्घा बताते हैं कि प्रकृति हमेशा दाहिने से बायें की ओर चलती है. इसी विचारधार पर आदिवासी समाज अपना सारा काम करता है. मसलन, जब हम नृत्य करते हैं, तो प्रकृति

के अनुरूप दाहिने से बायें की ओर बढ़ते हैं. उसी तरह हल भी चलाते हैं. कुम्हार का चाक भी इसी दिशा में चलता है. पेड़ की डालियां और पत्ते भी इसी दिशा से बढ़ते हैं. इसलिए उन्होंने आम घड़ी के विपरीत उल्टी घड़ी का आविष्कार किया.

रिपोर्ट- उपेन्द्र कुमार

ये भी पढ़ें- मकर संक्रांति के बाद होगा हेमंत मंत्रिमंडल का विस्तार, जेएमएम से इन्हें मिल सकता है मौका 

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पश्चिमी सिंहभूम से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 13, 2020, 4:59 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर