हेमंत सरकार के खिलाफ गोलबंद हो रहे आदिवासी, लैंड म्यूटेशन बिल को बताया 'काला कानून'

आदिवासियों के भारी विरोध के चलते पिछली रघुवर सरकार को सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल को वापस लेना पड़ा था. (फाइल फोटो)
आदिवासियों के भारी विरोध के चलते पिछली रघुवर सरकार को सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल को वापस लेना पड़ा था. (फाइल फोटो)

कोल्हान के आदिवासी (Tribal) लैंड म्यूटेशन बिल (Land Mutation Bill) को लेकर हेमंत सोरेन सरकार से नाराज चल रहे हैं. आदिवासियों ने इस बिल को काला कानून करार दिया है.

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चाईबासा. झारखंड के आदिवासी बहुल कोल्हान प्रमंडल में जल, जंगल और जमीन का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा माना जाता है. जल, जंगल और जमीन के खिलाफ किसी भी कानून के विरोध में आदिवासी (Tribal) न सिर्फ सड़क पर उतर जाते हैं बल्कि अपनी जान देने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. पिछली रघुवर सरकार में कोल्हान के आदिवासियों ने ही सबसे अधिक सीएनटी-एसपीटी एक्ट (CNT-SPT Act) में संशोधन का विरोध किया था. जिसके कारण तत्कालीन रघुवर सरकार को सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल वापस लेना पड़ा था. तब जेएमएम ने हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के नेतृत्व में विधानसभा में खूब हंगामा किया था.

लेकिन अब सत्ता में आने पर हेमंत सोरेन सरकार लैंड म्यूटेशन बिल ला रही है, जिसे रैयतों की जमीन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि रघुवर सरकार के सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल को ही नए तरीके से हेमंत सरकार ला रही है. जिसको लेकर कोल्हान में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं. विभिन्न आदिवासी संगठनों के नेता एक मंच पर आकर आगे की रणनीति बना रहे हैं.

लैंड म्यूटेशन बिल को काला कानून बता रहे आदिवासी



नये बिल के विरोध में आदिवासियों को गोलबंद किया जा रहा है. इस विरोध में मिशन से जुड़े संगठन भी काफी सक्रिय हैं. वहीं लैंड म्यूटेशन बिल के विरोध में झामुमो से जुड़े रहे नेता और पूर्व विधायक भी मुखर हो रहे हैं. लैंड म्यूटेशन बिल को इन नेताओं ने आदिवासी-मूलवासी के लिए काफी खतरनाक बताया है और इसे काला कानून की संज्ञा दे रहे हैं.
जगन्नाथपुर के पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबेंगा ने कहा कि इस कानून में उपसमाहर्ता को असीम अधिकार दिए गए हैं, जिसका दुरूपयोग निश्चित हैं. इससे गरीब आदिवासी-मूलवासी रैयतों की जमीन खतरे में रहेगी. इस कानून से भू-माफियाओं को सीधे लाभ होगा.

चक्रधरपुर के जेएमएम विधायक रहे शशिभूषण सामड ने कहा कि पिछली सरकार में हेमंत सोरेन ने सीएनटी-एसपीटी कानून संशोधन के विरोध में कई दिनों तक विधानसभा बाधित किया था. तब वो भी उनके साथ थे. आज वही हेमंत सोरेन काला कानून ला रहे हैं, तो उनका विरोध भी सड़क से लेकर सदन तक होगा.
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