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आखिर पलामू से क्यों पलायन कर रहे हैं मजदूर?

आखिर पलामू से क्यों पलायन कर रहे हैं मजदूर?

पलामू में वर्षों से बंद पड़े सोकरा ग्रेफाईट माइंस को चालू कराने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले कई सालों से आन्दोलन कर रहे हैं.

पलामू में वर्षों से बंद पड़े सोकरा ग्रेफाईट माइंस को चालू कराने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले कई सालों से आन्दोलन कर रहे हैं.

पलामू में वर्षों से बंद पड़े सोकरा ग्रेफाईट माइंस को चालू कराने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले कई सालों से आन्दोलन कर रहे हैं.

पलामू में वर्षों से बंद पड़े सोकरा ग्रेफाईट माइंस को चालू कराने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले कई सालों से आन्दोलन कर रहे हैं. माइंस के बंद रहने से जहां इलाके के लोग बेरोजगारी झेल रहे हैं, वहीं पलायन को भी मजबूर हैं.

क्या है मामला

चैनपुर प्रखंड का सोकरा ग्रेफाईट माइंस पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ा है. जब माइंस चालू हालत में था तब गांव के हजारों ग्रामीणों को रोजगार मिल जाता था. मगर माइंस बंद होने के बाद गांव में बेरोजगारी का आलम है. ग्रामीण दूसरे प्रदेश में पलायन को मजबूर हैं.

इतना ही नहीं, माइंस में काम करने वाले सैंकड़ो मजदूरों की मजदूरी भी बकाया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर माइंस खुल जाता तो आज गांव में रोजगार का साधन हो जाता और हमें काम के लिए घर छोड़ कर बाहर नहीं जाना पड़ता.

सोकरा बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण पिछले एक दशक से माइंस को शुरू करने के लिए आन्दोलन कर रहे हैं. इसी क्रम में मंगलवार को डालटनगंज कचहरी परिसर में सोकरा बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण अब गोलबंद हुए.

कंपनी नहीं कर रही बकाया भुगतान

सोकरा बचाव संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने बताया कि बकाया मजूदरी की मांग को लेकर बंद पड़े सोकरा ग्रेफाईट माइंस के मजदूर ने कोर्ट को भी सहारा लिया था जहां 1993 में उन्हें जीत हासिल हुई थी. कोर्ट ने कंपनी को भुगतान करने का निर्देश भी दिया था. मगर आज तक यह भुगतान कंपनी ने नहीं किया.

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