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Army Heroes: 13 टैंको को नेस्तनाबूद कर मेजर रॉय ने तोड़ा था पाक सेना का यह बड़ा सपना...

Army Heroes: 13 टैंको को नेस्तनाबूद कर मेजर रॉय ने तोड़ा था पाक सेना का यह बड़ा सपना...

Indo Pakistan War 1965: ऑपरेशन जिब्राल्‍टर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्‍तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ साजिश रची, जिसका नाम था ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम.

नई दिल्‍ली. ऑपरेशन जिब्राल्‍टर में मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्‍तान ने भारत के खिलाफ एक और साजिश रची और इस साजिश का नाम था ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम. दरअसल, ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम उन दिनों पाकिस्‍तान के सैन्‍य शासक अयूब का खान की सोच और पाकिस्‍तान सेना के जनरल अख्‍तर मलिक की खुराफात थी.

दोनों को इस बात का मुगालता था कि भारतीय सेना अखनूर के रास्‍ते कश्‍मीर में रसद और सैन्‍य सहायता पहुंचा रही है.  इसी मुगालते को लेकर पाकिस्‍तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम की साजिश रची. इस साजिश के तहत, पाकिस्‍तानी सेना को अखनूर ब्रिज पर कब्‍जा करना था.

पाकिस्‍तानी सेना का यह मानना था कि अखनूर ब्रिज पर कब्‍जा करके सेना की रसद और सैन्‍य सप्‍लाई बंद कर देंगे और जम्‍मू स्थित सैन्‍य ठिकानों को चुनौती दे सकेंगे.

पाकिस्‍तान ने अखनूर के लिए रवाना किए जंगी बेड़ा
अखनूर ब्रिज पर कब्‍जा करने के लिए पाकिस्‍तानी सेना ने अपना बड़ा जंगी बेड़ा रवाना कर दिया. इस पाकिस्‍तानी जंगी बेड़े में 8 इंफेंट्री बटालियन, 6 टैंक स्‍क्‍वाड्रन और 18 आर्टलरी बटालियन शामिल थीं. पाकिस्‍तान के इस जंगी बेड़े ने 1 सितंबर 1965 की सुबह करीब 5 बजे सा‍जिश को अंजाम देना शुरू कर दिया.

पाकिस्‍तानी सेना को छंब सेक्‍टर से भारतीय सीमा पर प्रवेश करके अखनूर तक पहुंचना था. साजिश के तहत, पाकिस्‍तान सेना ने छंब सेक्‍टर से हमले की पहल की. इस हमले में भारतीय सेना और पाकिस्‍तानी लड़ाकों के बीच जबरदस्‍त युद्ध हुआ.

इस युद्ध में दुश्‍मन सेना के मुकाबले आधे से भी कम क्षमता होने के बावजूद भारतीय सेना हर मोर्चे पर पाकिस्‍तानी लड़ाकों पर भारी पड़ रही थी. आखिर में पाकिस्‍तानी सेना को एक बार फिर भारतीय जाबांजों के सामने नाक रगड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मेजर भास्‍कर रॉय के नेतृत्‍व में भारतीय सेना ने दुश्‍मन के दांत किए खट्टे
छंब सेक्‍टर में तैनात मेजर भास्‍कर रॉय बख़्तरबंद कोर रेजिमेंट के एक स्क्वाड्रन की कमान संभाल रहे थे. पाकिस्‍तान सेना के मुकाबले भारतीय सेना की क्षमता आधे से भी कम थी. छंब के युद्ध में पाकिस्‍तानी सेना के पास 8 इंफेंट्री बटालियन थी, जबकि भारतीय सेना के पास महज 4 इंफेट्री बटालियन थीं.

टैंक स्‍क्‍वाड्रन की बात करें तो पाकिस्‍तान के पास 6 और भारत के पास महज 1 टैंक स्‍क्‍वाड्रन था. वहीं, 18 पाकिस्‍तानी आर्टलरी बटालियन के मुकाबले भारतीय सेना की सिर्फ 3 आर्टलरी बटालियन छंब के युद्ध में इतिहास रच रही थी.

छंब सेक्‍टर में भारतीय सेना भले ही संख्‍या बल में कम थी, लेकिन उनका मनोबल दुश्‍मन सेना से कहीं ऊंचा था. भारतीय सेना के इसी मनोबल ने दुश्‍मन सेना को उल्‍टे पांव भागने पर मजबूर कर दिया था.

टैंक से टैंक की लड़ाई में मेजर रॉय ने अकेले ध्‍वस्‍त किए दुश्‍मन सेना के 13 टैंक
ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम के तहत पाकिस्‍तानी सेना ने एक सितंबर 1965 की सुबह छंब सेक्‍टर पर हमला कर दिया. पाकिस्‍तानी सेना लगातार आर्टलरी फायर सपोर्ट और अमेरिका से खैरात में मिले पैंटन टैंकों के साथ आगे बढ़ रही थी.

भारतीय सीमा में दाखिल होते ही भारतीय सेना के जवान और टैंक दुश्‍मनों पर टूट पड़े. संख्‍याबल में कम होने की वजह से मेजर रॉय सटीक रणनीति के साथ दुश्‍मन का खात्‍मा करने में लगे हुए थे. छंब की लड़ाई में टैंक से टैंक के बीच भीषड़ युद्ध हुआ था.

इस युद्ध में मेजर भास्‍कर रॉय ने अकेले 13 पाकिस्‍तानी टैंको को नस्‍तेनाबूत किया था. छंब की इस लड़ाई में भारतीय सेना ने न केवल पाकिस्‍तानी सेना के मंसूबों पर पानी फेर दिया, बल्कि उन्‍हें रण छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया.

छंब की लड़ाई में भारतीय सेना की सर्वोत्तम परंपराओं के अनरूप विशिष्ट बहादुरी और उच्च कोटि के नेतृत्व का प्रदर्शन करने के लिए मेजर भास्‍कर रॉय को महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

Tags: Army Bharti, Army recruitment, Heroes of the Indian Army, Indian army, Indian Army Heroes, Sena Bharti

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