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IAS Preparation Tips: स‍िव‍िल सेवा परीक्षा में अच्‍छे अंक के ल‍िये पैसेज की कर लें अच्‍छी तैयारी

News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 5:15 PM IST
IAS Preparation Tips: स‍िव‍िल सेवा परीक्षा में अच्‍छे अंक के ल‍िये पैसेज की कर लें अच्‍छी तैयारी
आईएएस की परीक्षा में पैसेज एक महत्‍वपूर्ण ह‍िस्‍सा है.

यूपीएससी स‍िव‍िल सेवा की परीक्षा में उम्‍मीदवारों को पैसेज से अच्‍छा स्‍कोर हास‍िल हो सकता है. इसके ल‍िये लेक‍िन तैयारी कैसे करनी यह समझ लें यहां.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 5:15 PM IST
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यहांं मैं गद्यांश को पढ़ने के उस विज्ञान की चर्चा कर रहा हूंं, जो इसकी चुनौतियों का मुकाबला करने में आपकी मदद करेगा. मुझे लगता है कि गद्यांष की सारी चुनौतियांं मुख्यतः इसे पढ़ने की स्टाइल की चुनौती ही है. मैंने इस पर काफी प्रयोग किया है - अपने ऊपर भी और अपने स्टूडेन्ट्स पर भी. इन प्रयोगों से मुझे जो निष्कर्ष मिले हैं, मैं उन्हें ही यहांं आपके सामने रख रहा हूंं:

- गद्यांश को पढ़ने के मैंने दोनों तरीकों के प्रयोग किए. पहला यह कि पहले गद्यांश को पूरा पढ़ लें और फिर प्रश्‍नों को पढ़ेंं. दूसरा तरीका यह कि पहले प्रश्‍नों को पढ़ लें, फिर गद्यांश को पढ़ें. मुझे दूसरे तरीके के परिणाम अधिक अच्छे मिले.

दरअसल, यदि आप गद्यांश को पढ़ने से पहले ही उससे जुड़े प्रश्‍नों को पढ़ लेते हैं, तो उससे फायदा यह होता है कि गद्यांश को पढ़ते समय आपका ध्यान उन अंशों पर थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और उन पर विशेष जोर दे देता है, जो प्रश्‍नों से जुड़े हुए हैं. आप उन अंशों को उसी समय विशेष ध्यान से पढ़ सकते हैं. इससे सटीक उत्‍तर पाने में मदद मिल जाती है. इसलिए बेहतर होगा कि पहले उससे जुड़े प्रश्‍नों को पढ़े. ऐसा मैं केवल समय की बचत की दृष्टि से कह रहा हूंं, किसी अन्य दृष्टि से नही. यदि आपके पास सी सेट के पेपर में समय की कोई विशेष समस्या नहीं है या आपके पढ़ने की रफ्तार तेज है, तो आप विकल्पों को भी पढ़ सकते हैं.

- दिए गए गद्यांश को आपको दो बार पढ़ना ही चाहिए. न तो एक बार ही पढ़कर छोड़ देंं और न ही तीन बार पढ़ने के चक्कर में पड़े. एक बार पढ़ने से उत्‍तर अच्छी तरह पकड़ में नहीं आएंंगे और तीन बार पढ़ने में समय अधिक लगेगा. दो बार पढ़ने की स्थिति ही सबसे आदर्श स्थिति होती है.



- जब आप गद्यांष को दूसरी बार पढ़ें, तो उन शब्दों या स्थानों पर पेन्सिल से हल्का-सा निशान लगा दें, जिनका संबंध आपके उत्‍तरों से है. इससे भी बेहतर होगा कि आप यह काम पहली बार पढ़ते समय ही कर लें. इससे आपको यह पता लग जाएगा कि आपका उत्‍तर किस स्थान पर है और आप उसी पर विशेष ध्यान देकर ठोस उत्‍तर तक पहुंंच सकेंगे.

- कभी-कभी पूरे गद्यांश का आशय भी पूछ लिया जाता है. इसलिए आपको इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि आप गद्यांश का भावार्थ पकड़ सकें. यानी कि यह जान सकें कि इस अंश का संबंध मूल रूप में किससे है.

यहांं मैं एक विशेष तथ्य बताना चाहूंगा, जो गद्य दिया गया है, वह सम्पूर्ण गद्य नहीं है, गद्यांश है. यानी कि एक कोई बड़ा लेख था, जिसका एक छोटा भाग आपको दिया गया है. हो सकता है कि लेख का संबंध किसी अन्य विषय से हो और यदि इस अंश को उस मूल विषय से जोड़कर देखा जाए, तो उसमें यह फिट नहीं बैठेगा. लेकिन इससे आपका कोई लेना-देना नहीं है. यहांं आपका मतलब सिर्फ इससे होना चाहिए कि इस अंक को, जो आपके सामने मौजूद है, संबंध किससे है. उसी पर फोकस कीजिए. उसके बड़े वाले अंष पर मत जाइए. उदाहरण के तौर पर, एक लेख प्रदूषण पर हो सकता है और उसी लेख का एक अंश ध्वनि प्रदूषण पर. अब आप इस गद्यांश के लिए ‘प्रदूषण‘ शब्द को न चुनकर ‘ध्वनि प्रदूषण‘ शब्द को चुनेंगे.

आपको चाहिए कि आप इस तरीके का अभ्यास करें. अपठित गद्यांश पर बहुत-सी पुस्तकें उपलब्ध हैं. आप उन्हें पढ़ें और वैज्ञानिक तरीके से पढ़ें, उस तरीके से, जिस तरीके से मैंने बताया है, अव्यवस्थित तरीके से पढ़कर हो सकता है कि आप उत्‍तर तो ढूंंढ़़ लें, लेकिन आपका दिमाग व्यवस्थित नहीं हो पाएगा. आपको इस बारे में अपने दिमाग को व्यवस्थित करना है, ताकि परीक्षा हाॅल में वह वैज्ञानिक तरीके से काम करके आपको अधिक से अधिक अंक दिला सके. बोधगम्यता वाले प्रश्‍नों में अधिक से अधिक अंक दिलाने की क्षमता होती है.

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First published: March 25, 2020, 5:14 PM IST
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