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IAS Preparation Tips: सिविल सेवा परीक्षा की नींव है मानसिक मजबूती

आईएएस परीक्षा की तैयारी में आपको धैर्य रखने के साथ-साथ इस बात का भी ध्‍यान रखना होगा क‍ि क‍िसी घटना की सच्‍चाई जाने बगैर उसका न‍िष्‍कर्ष ना न‍िकालें.

आईएएस परीक्षा की तैयारी में आपको धैर्य रखने के साथ-साथ इस बात का भी ध्‍यान रखना होगा क‍ि क‍िसी घटना की सच्‍चाई जाने बगैर उसका न‍िष्‍कर्ष ना न‍िकालें.

IAS Preparation Tips: स‍िव‍िल सेवा परीक्षा में उम्‍मीदवारों के ज्ञान की जांच ही नहीं होती. बल्‍कि‍ उनकी मानस‍िक मजबूती को भी चेक क‍िया जाता है. कोरोना वायरस के इस समय में आईएएस परीक्षार्थ‍ियों को तैयारी के दौरान इन बातों का जरूर ध्‍यान रखना चाह‍िये.

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आईएएस (IAS) बनने के लिए तैयारी करने वालों में कुछ तो ऐसे होते ही हैं, जो इसकी तैयारी को सम्पूर्णता में देखते हैं. सम्पूर्णता से यहां मेरा आशय तैयारी के ज्ञान पक्ष के साथ उनका ध्यान अपनी मानसिक मजबूती पर भी होता है. अन्यथा तो युवाओं का एक बड़ा वर्ग एक बेहतर ‘किताबी कीड़ा’ बनने के पीछे पड़ा ही रहता है और यही उनकी असफलता का सबसे बड़ा कारण बन जाता है. मुझे लगता है कि कोरोना वायरस ने फिलहाल देश में जो स्थितियां उत्पन्न की हैं, उसके समुचित अवलोकन से इस मानसिक मजबूती की भूमिका को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

इसकी भूमिका के दो पक्ष हैं. इसका पहला पक्ष उस परीक्षार्थी से जुड़ा हुआ है, जो 31 मई की प्रारम्भिक परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा है. मैंने पाया है कि सरकार ने जैसे ही राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा की, वैसे ही अधिकांश परीक्षार्थियों ने अपने दिमाग का भी लॉकडाउन कर दिया. उन्हें लगने लगा कि चूंकि पूरे देश में बंदी है, तो फिर वे तैयारी करेंगे कैसे? इस अवसर को अपनी तैयारी के लिए एक ‘सुअवसर’ या ‘वरदान’ समझने के स्थान पर उन्होंने

तैयारी न कर पाने के एक अच्छे बहाने के रूप में लिया. इस वर्ग के परीक्षार्थियों को सिविल सर्वेन्ट के लिए आवश्यक मानसिक मजबूती की कमी वाले परीक्षार्थी के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए. यह उनके व्यक्तित्व की बहुत बड़ी मूलभूत कमी की ओर संकेत करता है.

दूसरे पक्ष के रूप में जिला प्रशासन को सम्भालने वाले कलेक्टर एवं एसपी के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर ध्यान दें. ये सभी कभी आपकी तरह ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. उसमें सफल होकर आज ये चुनौतियों का मुकाबला कर रहे हैं. सरकार ने साफ तौर पर कह दिया है कि लॉकडाउन की किसी भी प्रकार की असफलता के लिए जिले के कलेक्टर और एस पी ही जिम्मेदार होंगे. जहां असफलता के प्रमाण मिले हैं, वहां उन्हें तुरंत उनके पदों से हटा दिया गया है. दिल्ली से लेकर देश के कोने-कोने तक की प्रशासनिक व्यवस्था को ये सिविल सर्वेन्ट सम्भाले हुए हैं. इनके हाथों में हजारों-लाखों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. आपको क्या लगता है कि इस जिम्मेदारी के समुचित निर्वाह के लिए किताबी ज्ञान की जरूरत है या मानसिक सुदृढ़ता की?

यहां तक कि इस प्रतियोगिता का जो स्वरूप है, इसके लिए जितनी लंबी और व्यापक तैयारी करनी पड़ती है, परीक्षा के तीन-तीन स्तरों पर जूझना होता है, यह सब तब तक संभव नहीं हो सकता, जब तक कि आप मानसिक रूप से पर्याप्त मजबूत न हों. इसके अभाव के कारण ही तैयारी के दौरान मन में बार-बार निराशा का भाव आता है. ऐसी मानसिकता के साथ पढ़ाई करते रहने का कोई विशेष अर्थ नहीं रह जाता.

कुल-मिलाकर यह कि सिविल सेवा की तैयारी करने वाले सभी परीक्षार्थियों को यह समझना चाहिए कि मानसिक मजबूती इस तैयारी की नींव होती है और मुझे इसके लिए लगातार कोशिश करते रहना है.

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