IAS Success Story: कभी माता-पिता के लिए छोड़ दी थी पढ़ाई, फिर ऐसे क्रैक किया UPSC का एग्जाम

साधारण परिवार से तालुल्क रखने वाले  शेखर कुमार आज IRS हैं.
साधारण परिवार से तालुल्क रखने वाले शेखर कुमार आज IRS हैं.

IAS Success Story: आज शेखर कुमार आईआरएस ऑफिसर हैं उन्हें साल 2010 में यह सफलता मिली थी. उनके पिता हमेशा उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया करते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 3, 2020, 10:46 AM IST
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IAS Success Story: बेहद साधारण से परिवार से तालुल्क रखने वाले शेखर कुमार डीएम नहीं बनना चाहते थे, लेकिन उनके माता-पिता का सपना था कि उनका बेटा सिविल सर्विस में जाए. ऐसे में शेखर कुमार ने अपने माता-पिता के सपने को अपना बनाया और इसे पूरा करने की कोशिश में लग गए. लेकिन शेखर कुमार का यह सपना साकार करना इतना आसान नहीं था, उन्हें कई बार मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. शेखर विफलताओं के बाद भी सफलता की उम्मीद में प्रयास करते रहे, जिसके बाद उनको सफलता भी मिली और वो IRS भी बने.

आज शेखर कुमार आईआरएस ऑफिसर हैं उन्हें साल 2010 में यह सफलता मिली थी. उनके पिता हमेशा उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया करते थे. इस पर शेखर ने अपने पिता की ख्वाहिश पूरी करने के लिए सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की. पहली बार वो परीक्षा देने गए लेकिन उस परीक्षा में 10 मिनट लेट पहुंचने की वजह से उन्हें पेपर नहीं देने दिया गया. जिसकी वजह से उनका पूरा साल बर्बाद हो गया, इस घटना के बाद उन्होंने सिविल सर्विस का सपना छोड़ दिया था. इसके बाद भी शेखर के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं.

शेखर के माता-पिता सिर्फ दसवीं तक ही पढ़ाई कर पाए थे, ऐसे में उनके माता-पिता चाहते थे कि हमारे बच्चे उस मुकाम तक पहुंचें जहां तक हम नहीं पहुंच पाए. इसी बीच शेखर के परिवार में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी. उस वक्त उनके लिए माता-पिता अधिक महत्वपूर्ण थे. दरअसल शेखर के माता-पिता कार एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल हो गए थे. इस एक्सीडेंट में मां पैरालाइज्ड हो गईं थीं जबकि पिता कोमा में चले गए थे.



उस दौरान शेखर और उनके भाई दोनों को ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. इस एक्सीडेंट के बाद पिता डिप्रेशन में चले गए थे, लेकिन मां के विश्वास ने उन्हें फिर से उठने के लिए हौंसला दिया. शुरू के दिनों की पढ़ाई उन्होंने बिहार से की, लेकिन 10वीं के बाद वे दिल्ली आ गए. शुरू में शेखर सिविल सर्विस में नहीं जाना चाहते थे बल्कि एक प्रोफेसर बनना चाहते थे, लेकिन 12वीं के बाद उनके पिता चाहते थे कि वे इंजीनियरिंग करें. ऐसे में वो तैयारी के लिए कोटा चले गए, लेकिन इस बीच माता-पिता के एक्सीडेंट के बाद दोनों भाईयों को एक साल तक के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी.
मां के कहने पर शेखर कपूर ने फिर से पढ़ाई शुरू की और उन्होंने दिल्ली से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद वे अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए. इस एक्सीडेंट के बाद शेखर का आत्मविश्वास भी काफी कम हो गया था, लेकिन पिता के प्रोत्साहित करने पर उन्होंने तैयारी शुरू कर दी. एक बार परीक्षा छूटने के बाद उन्होंने बैंक की भी परीक्षा दी थी, जिसमें वे सेलेक्ट हो गए थे. इसके बाद मां के कहने पर उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसमें वे सेलेक्ट हो गए.

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