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BSF Day: गांव-गांव जाकर ‘रुस्तमजी’ ने किया था जवानों का चयन, जानें कैसा था बीएसएफ का शुरुआती सफर

BSF Day: गांव-गांव जाकर ‘रुस्तमजी’ ने किया था जवानों का चयन, जानें कैसा था बीएसएफ का शुरुआती सफर

जनवरी 1965 में गुजरात के कंजरकोट इलाके में पाकिस्‍तानी सेना की हरकतों को देखने के बाद तत्‍कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने सीमा सुरक्षा के लिए एकल बल के गठन का रास्‍ता खोल दिया था. तत्कालीन उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम की रिपोर्ट के आधार पर बीएसएफ का ब्‍लू प्रिंट तैयार हुआ और मध्‍य प्रदेश के तत्‍कालीन आईजीपी खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी ने इस ब्‍लू प्रिंट को अमलीजामा पहनाया था.

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नई दिल्‍ली. जनवरी 1965 में गुजरात के कंजरकोट इलाके में पाकिस्‍तान की नापाक हरकत दर्ज की गई थी. भारत ने पाकिस्‍तान की इस नापाक हरकत को बेहद गंभीरता से लिया और अंतरराष्‍ट्रीय सीमा की सुरक्षा के लिए एक समर्पित फोर्स के गठन का फैसला लिया गया. इस फोर्स के गठन की जिम्‍मेदारी वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी को दी गई. उन दिनों, खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी मध्‍य प्रदेश के आईजीपी के पद पर तैनात थे.

बार्डर सिक्‍योरिटी फोर्स – इंडियाज फस्‍ट लाइन ऑफ डिफेंस नामक पुस्‍तक में दर्ज जानकारी के अनुसार, मध्‍य प्रदेश के आईजीपी का चार्ज हैंडओवर करने के बाद खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी दिल्‍ली पहुंचे और 21 जुलाई 1965 को अपना ज्‍वाइनिंग नोट लिखा. उन्‍हें एक ऐसे संगठन का प्रमुख बनाया गया था, जिसमें सिर्फ और सिर्फ वो थे. इस अकेले बार्डरमैन का न ही कोई मातहत था और न ही उनका कोई अधिकारी था.

25 बटालियन के साथ हुई बीएसएफ की शुरुआत
1965 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के बाद बार्डर सिक्‍योरिटी फोर्स के लिए अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई. खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी ने पुलिस, थल सेना, वायु सेना, नौसेना और अकादमिक जगत में मौजूद सर्वश्रेष्‍ठ लोगों का चयन अपनी नई फोर्स के लिए किया. इसके अलावा, पाकिस्‍तान बार्डर पर तैनात कुछ बेहतर बटालियनों को भी बीएसएफ में शामिल किया गया. इस तरह, 25 बटालियन के साथ बीएसएफ के गठन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया.

गांव-गांव जाकर किया बीएसएफ के जाबांजों का चुनाव
अब, बीएसएफ को अधिक सशक्‍त बनाने के लिए खुसरो फ़रामुर्ज़ रुस्तमजी को ऐसे जवानों की जरूरत थी, जो न केवल शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ्‍य और बलिष्‍ठ हों, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से बेहतर हों. इस लक्ष्‍य को पूरा करने के लिए रुस्‍तमजी ने अपने अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा. इन ग्रामीण क्षेत्रों से चुने गए नौजवानों के साथ 12 नई ब‍टालियन तैयार की गईं. वहीं, 1966 में जम्मू-कश्मीर में तैनात 15 अन्‍य बटालियनों को भी बीएसएफ के साथ जोड़ दिया गया.

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55 सालों में 25 से 186 हुईं बीएसएफ की बटालियन
इस तरह, महज एक साल के भीतर बीएसएफ 52 बटालियन वाली एक सशक्‍त फोर्स के रूप में तैयार हो चुकी थी. 55 सालों के असाधारण सफर के दौरान, बीएसएफ का वृहद विस्‍तार हुआ. 1965 में महज 25 बटालियन से शुरुआत करने वाली बीएसएफ में आज 186 बटालियन और 257,363 जवान हैं. इसके अलावा, इन 55 सालों में बीएसएफ ने एयर विंग, मरीन विंग, आर्टिलरी रेजिमेंट और विशेष इकाइयों के जरिए खुद को बेहद सशक्‍त किया है.

Tags: BSF, Indian army, Know your Army

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