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Know your Army Heroes: Army Heroes: ज़ोजिला की जंग में वीरता की अद्भुत कहानी लिख गए ब्रिगेडियर अटल

Know your Army Heroes: Army Heroes: ज़ोजिला की जंग में वीरता की अद्भुत कहानी लिख गए ब्रिगेडियर अटल

ज़ोजिला दर्रे से शुरू होकर कारगिल पर खत्‍म होने वाले इस ऑपरेशन में अद्भुत युद्ध कौशल दिखाने वाले ब्रिगेडियर अटल को महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

ज़ोजिला दर्रे से शुरू होकर कारगिल पर खत्‍म होने वाले इस ऑपरेशन में अद्भुत युद्ध कौशल दिखाने वाले ब्रिगेडियर अटल को महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

Know your Army Heroes: ज़ोजिला दर्रे पर नापाक इरादा लेकर पहुंचे पाकिस्‍तानी दुश्‍मनों को ब्रिगेडियर कन्‍हैया लाल अटल ने अंजाम तक पहुंचाया था. 1 नवंबर 1948 को ज़ोजिला दर्रे से शुरू हुआ यह स्‍पेशल ऑपरेशन 23 नवंबर 1948 को कारगिल पर खत्‍म हुआ था. इस पूरे इलाके को ब्रिगेडियर अटल ने अपने साथियों के साथ मिलकर दुश्‍मन के शवों से पाट दिया था.

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    नई दिल्‍ली. भारत और पाकिस्‍तान के बीच 22 अक्‍टूबर 1947 को शुरू हुआ युद्ध अभी जारी था. भारतीय सेना को सूचना मिली थी कि दुश्‍मन ने ज़ोजिला के दर्रे पर मजबूत किलेबंदी कर रखी है. ज़ोजिला दर्रे पर दुश्‍मन की मौजूदगी के चलते द्रास-कारगिल मार्ग पर आवागमन बेहद असुरक्षित हो गया था. जोजिला दर्रे से दुश्‍मन को खदेडने की जिम्‍मेदारी ब्रिगेडियर कन्‍हैया लाल अटल के नेतृत्‍व में 77 ब्रिगेड को सौंपी गई.

    घाटी में अब ठंड बहुत बढ़ चुकी थी और हाड़ कंपाती ठंड में दर्रे तक पहुंचना भारतीय सैनिकों के लिए आसान नहीं था. ब्रिगेडियर अटल ने तमाम प्राकृतिक अडचनों को नजरअंदाज कर अपने साथियों के साथ मिशन की तरफ बढ़ चले. 1 नवंबर 1948 को ब्रिगेडियर अटल के नेतृत्‍व में शुरू हुए इस स्‍पेशल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया. भारतीय सेना की बहादुरी के चलते जोजिला दर्रे पर दुश्‍मन की मजबूत किलेबंदी को ढहा दिया गया.

    दर्रे पर जीत के बाद भी खत्‍म नहीं हुईं चुनौतियां
    भले ही, ज़ोजिला के दर्रे पर अब भारतीय सेना का पूरी तरह कब्‍जा हो चुका था और द्रास-कारगिल मार्ग पर मौजूद बाधा को हटा दिया गया था, लेकिन ब्रिगेडियर अटल की चुनौतियां अभी खत्‍म नहीं हुईं थीं. ज़ोजिला दर्रे पर जीत के बाद ब्रिगेडियर अटल को आभास हुआ था कि पीछे के कुछ दर्रों पर अभी भी दुश्‍मन की मौजूदगी बनी हुई है. जब तक इन दर्रों से दुश्‍मन का खात्‍मा नहीं किया जाता, खतरा ज्‍यों का त्‍यों बना रहेगा.

    हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड और इलाके में दुश्‍मन की मजबूत मौजूदगी के बीच ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला ब्रिगेडियर अटल के लिए आसान नहीं था. देश के खातिर ब्रिगे‍डियर अटल ने एक बार फिर असंभव सी दिखती चुनौतियों का सामना करने का फैसला किया. इस ऑपरेशन में ब्रिगेडियर अटल के साथ मौजूद हर भारतीय सिपाही ने उनके इस फैसले के साथ खड़ा दिखा. साथी जवानों का साथ मिलने के बाद ब्रिगेडियर अटल ने ज़ोजिला में ही ऑपरेशन की विस्‍तृत योजना तैयार की.

    पिंडरास में भारतीय सेना के 18 सैनिक हुए हताहत
    ब्रिगेडियर अटल के नेतृत्‍व में अब भारतीय सेना अपने अगले लक्ष्‍य की तरफ बढ़ चुकी थी. अपने लक्ष्‍य की तरफ बढ़ती सेना के पैर अचानक मोर्टार और हैवी मशीनगन की फायरिंग ने रोक दिया. दरअसल, रास्‍ते में पड़ने वाले पिंडरास दर्रे पर दुश्‍मन ने एक और मजबूत किला बना रखा था. यहां दुश्‍मन लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच कड़ा मुकाबला हुआ. इस युद्ध के दौरान, 1/5 गोरखा राइफल्‍स की सी कंपनी के 18 सैनिक हताहत हो चुके थे.

    इसी बीच, ब्रिगेडियर अटल पर भी भारी मशीनगन और मोर्टार से सीधा हमला शुरू हो गया. उन्‍होंने बड़ी बहादुरी और युद्ध कौशल का परिचय देते हुए दुश्‍मन के हमले को न केवल नाकाम कर दिया, बल्कि मोर्टार और मशीनगन के साथ दुश्‍मन को भी हमेशा के लिए खामोश कर दिया. पिंडरास पर दुश्‍मन के किले को ध्‍वस्‍त करने के बाद ब्रिगेडियर अटल के कदम अपने लक्ष्‍य कारगिल की तरफ बढ़ चले.

    कारगिल में जीत के साथ खत्‍म हुआ यह ऑपरेशन
    पिंसरास की चुनौती को ध्‍वस्‍त करने के लिए ब्रिगेडियर अटल अपने साथियों के साथ कारगिल की तरफ बढ़ चले. कारगिल से करीब छह किलोमीटर पहले ब्रिगेडियर अटल अपनी योजना को अंतिम रूप देने के लिए रुक गए. यहां पर फैसला लिया गया कि कारगिल में मौजूद दुश्‍मनों पर दोतरफा हमला किया जाएगा. दूसरी तरफ से हमले की जिम्‍मेदारी खुद ब्रिगेडियर अटल ने संभाली.

    करीब दो कंपनियों को साथ लेकर ब्रिगेडियर अटल दुर्गम पहाड़ी रास्‍ते की तरफ से दुश्‍मन की तरफ निकल पड़े. कई घंटों की कठिन जद्दोजहद के बाद ब्रिगेडियर अटल दुश्‍मन को दूसरी तरफ से घेरने में कामयाब रहे. वहीं, दो तरह से एक सा‍थ हुए हमले ने दुश्‍मन को संभलने का मौका भी नहीं दिया. कारगिल घाटी पर मौजूद सभी दुश्‍मनों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया. इस तरह, 23 नवंबर 1948 को ब्रिगेडियर अटल का ऑपरेशन सफलता पूर्वक पूरा हो गया.

    महावीर चक्र से किए गए सम्‍मानित
    पूरे ऑपरेशन के दौरान, ब्रिगेडियर अटल ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना दुश्मन की आग के तहत नेतृत्व और व्यक्तिगत साहस का एक बहुत ही उच्च उदाहरण स्थापित किया. इस ऑपरेशन में उनके अद्भुद साहस, युद्ध कौशल और बेहतरीन नेतृत्‍व करने के लिए ब्रिगेडियर कन्‍हैया लाल अटल को महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया.

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    Tags: Heroes of the Indian Army, Indian army, Indian Army Heroes

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