Home /News /jobs /

Indo-PAK War 1965: दुश्मन के बंकर में घुसकर छीन ली मशीनगन, साथियों की जान बचाते हुए शहीद हुए गुरमेल सिंह

Indo-PAK War 1965: दुश्मन के बंकर में घुसकर छीन ली मशीनगन, साथियों की जान बचाते हुए शहीद हुए गुरमेल सिंह

1965 के भारत-पाक युद्ध में सिख रेजिमेंट के सिपाही गुरमेल सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

1965 के भारत-पाक युद्ध में सिख रेजिमेंट के सिपाही गुरमेल सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

Indo-Pak War 1965 Memories: सिपाही गुरमेर सिंह ने देश और अपने साथियों की रक्षा के लिए रणभूमि में ही अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दे दिया. उन्‍होंने सेना की सर्वोत्तम परंपराओं में अनुकरणीय साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. उनके सर्वोच्‍च त्‍याग को देखते हुए मरणोपरांत वीर चक्र के सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया था.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्‍ली. आज से 56 साल पहले की बात करें तो इन दिनों भारत और पाकिस्‍तान के बीच भीषण युद्ध छिड़ा हुआ था. जम्‍मू और कश्‍मीर को जबरन हथियाने के नापाक मंसूबों के साथ पाकिस्‍तान ने 1965 के भारत-पाक युद्ध की शुरूआत कर दी थी. हालांकि यह बात दीगर है कि भारतीय सेना के बहादुर रणबाकुरों ने पाकिस्‍तान की हर साजिश को नाकाम कर दुष्‍मनों को मुंह की खाने के लिए मजबूर कर दिया था. इन्‍हीं रणबाकुरों में रणबाकुरे थे सिख रेजिमेंट के सिपाही गुरमेर सिंह, जिन्‍होंने अपने साथियों की जान बचाने और दुश्‍मनों से देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दिया था. सिपाही गुरमेर सिंह की बहादुरी को देखते हुए उन्‍हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया था.

यह बात 25 अगस्‍त 1965 की थी. भारत और पाकिस्‍तान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के बीच दुश्‍मन एक ऐसी लोकेशन तक पहुंचने में कामयाब हो गया था, जहां से वह एक अहम एप्रोच रोड पर निगाह रख सकता था. दुश्‍मन सेना इस एप्रोच रोड से गुजरने वाले भारतीय सेना के वाहनों पर एमएमजी और एलएमजी से लगभग गोलियों की बरसात कर रहा था. ऐसे में, भारतीय सेना के लिए इस इलाके को पाकिस्‍तान सेना के चंगुल से छुड़ाना बेहद अहम हो चुका था. इस एप्रोच रोड को पाकिस्‍तान सैनिकों के चंगुल से मुक्‍त कराने की जिम्‍मेदारी सिख रेजिमेंट की एक टुकड़ी को मिली. सिख रेजिमेंट की इसी टुकड़ी में सिपाही गुरमेल सिंह भी शामिल थे.

सिपाही गुरमेर सिंह ने खामोश की दुश्‍मन की एमएमजी
सिपाही गुरमेल सिंह अपने साथियों के साथ उस जगह तक पहुंचने में कामयाब हो गए, जहां से एमएमजी और एलएमजी लगातार गोलियां बरसा रही थीं. इन एमएमजी और एलएमजी को खामोश करने के मकसद से सिपाही गुरमेल सिंह अपनी जान की परवाह किए बगैर दुश्‍मन की तरफ कूद पडे़. उन्‍होंने अपने हाथों से दुश्‍मन की एमएमजी के बैरल को पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया. स‍िपाही गुरमेल सिंह के इस साहसिक कदम से दुश्‍मन की ये मशीन गनें तो खामोश हो गई, लेकिन इसी दौरान एक बस्‍ट फायर इस भारतीय जाबांज को आ लगा.

मरणोपरांत वीर चक्र से हुए सम्‍मानित
इस बस्‍ट फायर के चलते सिख रेजिमेंट के बहादुर सिपाही गुरमेल सिंह गंभीर रूप से जख्‍मी हो गए.  उन्‍होंने देश और अपने साथियों की रक्षा के लिए रणभूमि में ही अपने प्राणों का सर्वोच्‍च बलिदान दे दिया. सिपाही गुरमेल सिंह ने सेना की सर्वोत्तम परंपराओं में अनुकरणीय साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. उनके सर्वोच्‍च त्‍याग को देखते हुए मरणोपरांत वीर चक्र के सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया था.

Tags: Heroes of the Indian Army, Indian army, Indian Army Heroes, Indo Pakistan War 1965, Vir Chakra

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर